जीवन के फलसफे और साहित्य का उत्सव: हैदराबाद में गूंजेंगे नए शब्द, ‘मेरीना ओ मेरीना’ के लोकार्पण की तैयारी
ज़िंदगी अक्सर ऐसे दोराहों पर लाकर खड़ा कर देती है जहां फैसले लेना आसान नहीं होता। हर मोड़ पर कई रास्ते नज़र आते हैं, लेकिन हर रास्ता मंज़िल तक नहीं ले जाता। ऐसे ही वक्त में इंसान की नैतिकता, साहस और उसका विश्वास ही उसे सही दिशा दिखाते हैं। साहित्य और शायरी का काम भी यही है—जीवन की जटिलताओं को सरल शब्दों में पिरोकर हमारे सामने रखना। जहां पुराने शेर हमें ज़िंदगी की हकीकत से रूबरू कराते हैं, वहीं नए दौर का साहित्य इन परम्पराओं को आगे बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में हैदराबाद शहर एक और साहित्यिक शाम का गवाह बनने जा रहा है।
जीवन की उलझनों को सुलझाते अल्फाज़
जीवन के इम्तिहानों में जब इंसान खुद को अकेला पाता है, तो कुछ शेर ऐसे होते हैं जो न सिर्फ ढांढस बंधाते हैं, बल्कि जीने का सलीका भी सिखाते हैं। वामिक जौनपुरी का यह शेर— “जहां चोट खाना, वहीं मुस्कुराना, मगर इस अदा से कि रो दे ज़माना”— हमें सिखाता है कि तकलीफ में भी गरिमा कैसे बनाए रखनी है। वहीं, ऐजाज़ रहमानी चेताते हैं कि इंसान का कद उसके बर्ताव से तय होता है, न कि उसकी हैसियत से।
अक्सर हम दुनिया की भीड़ में अपनी पहचान को लेकर परेशान रहते हैं, लेकिन बशीर बद्र साहब की यह पंक्ति बड़ी राहत देती है कि “ये दुनिया है यहां कोई जगह ख़ाली नहीं रहती, किसी के आने-जाने से कभी कुछ कम नहीं होता।” जीवन नश्वर है, बेदिल का शेर “मेरे पीछे चले आओ, तुम्हारा रहनुमा हूं मैं” इसी अटल सत्य की याद दिलाता है।
ज़मीर, वक्त और रिश्तों की कसौटी
आज के दौर में सफलता की दौड़ में लोग अपना बहुत कुछ पीछे छोड़ देते हैं। कमर इकबाल ने इसी द्वंद्व पर गहरा प्रहार किया है— “इक चीज़ थी ज़मीर जो वापस न ला सका, लौटा तो है ज़रूर वो दुनिया ख़रीदकर।” यह पंक्तियां सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या पाने के लिए हम क्या खो रहे हैं।
वकील अख़्तर और वसीम बरेलवी जैसे शायरों ने दर्द और एकता के पहलुओं को छुआ है। चाहे वह “उजाला तो फिर भी जुदा नहीं होता” हो या फिर सलीम शाहिद की चेतावनी कि “इस रास्ते में एक समुंदर भी आएगा”, ये सभी शेर हमें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। चकबस्त और फिराक गोरखपुरी जैसे दिग्गजों ने गुनाह, इश्क और खुदा के रिश्तों को अपनी कलम से नई परिभाषा दी है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। अज्ञात शायरों की पंक्तियां भी हमें वक्त की अहमियत और बड़े लोगों से मिलने में बरती जाने वाली सावधानी के प्रति आगाह करती रहती हैं।
हैदराबाद में सजेगी साहित्यिक महफिल
साहित्य की इसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, हैदराबाद एक विशेष आयोजन के लिए तैयार है। शहर के रवींंद्र भारती में 1 फरवरी, रविवार की शाम एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मौका है प्रसिद्ध कवि वल्लभ आचार्य के नए तेलुगु कविता संग्रह ‘मेरीना ओ मेरीना’ (Merina O Merina) के विमोचन का।
आयोजकों ने मंगलवार को जारी एक बयान में साहित्य प्रेमियों, छात्रों और संस्कृति के संरक्षकों को इस खास मौके पर आमंत्रित किया है। यह शाम न केवल एक किताब के लोकार्पण की होगी, बल्कि कवि के विचारों और उनकी दृष्टि को समझने का एक माध्यम भी बनेगी।
वरिष्ठ साहित्यकारों का होगा जमावड़ा
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता तेलुगु साहित्य में अपने योगदान के लिए मशहूर कवि और साहित्यिक आलोचक चिंतापतला सुदर्शन करेंगे। पुस्तक का औपचारिक विमोचन वरिष्ठ पत्रकार, कवि और चित्रकार अंबाती सुरेंद्र राजू द्वारा किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन शहर के जीवंत सांस्कृतिक और काव्य परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा। जिस तरह पुराने शेर जीवन की राह दिखाते हैं, उम्मीद है कि वल्लभ आचार्य की यह नई कृति भी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।