4 फ़रवरी 2026

इंट्राडे ट्रेडिंग का दोहरा चेहरा: जहाँ रिटेल निवेशक गंवा रहे हैं पैसा, वहीं XTX जैसी एल्गोरिद्मिक फर्म्स काट रही हैं मुनाफे की फसल

शेयर बाजार की चकाचौंध अक्सर नए निवेशकों को अपनी ओर खींचती है, और इसमें सबसे ज्यादा आकर्षण ‘इंट्राडे ट्रेडिंग’ का होता है। आसान शब्दों में कहें तो इंट्राडे ट्रेडिंग, जिसे ‘डे ट्रेडिंग’ भी कहते हैं, का मतलब है एक ही कारोबारी दिन के भीतर शेयरों या अन्य वित्तीय उपकरणों को खरीदना और बेचना। इसमें बाजार बंद होने से पहले सभी सौदे निपटा दिए जाते हैं और शेयरों की कोई वास्तविक डिलीवरी या मालिकाना हक निवेशक के पास नहीं आता। पहले यह क्षेत्र केवल बड़ी वित्तीय फर्मों और पेशेवर ट्रेडर्स तक सीमित था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और मोबाइल ऐप्स की सुलभता ने इसे आम आदमी के बेडरूम तक पहुंचा दिया है। हालांकि, इस सुलभता के पीछे एक कड़वी सच्चाई और बड़ी संस्थागत कंपनियों का बढ़ता वर्चस्व छिपा है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?

भले ही इंट्राडे ट्रेडिंग त्वरित मुनाफे का सपना दिखाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत काफी अलग है। बाजार के आंकड़े बताते हैं कि करीब 90 से 95 फीसदी रिटेल निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग में अंततः नुकसान ही उठाना पड़ता है। इसका सबसे बड़ा कारण जानकारी और अनुभव का अभाव है। अधिकांश नए निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव (वोलेटिलिटी) के पीछे के गणित को समझे बिना मैदान में कूद पड़ते हैं। वे अक्सर ‘कट लॉस’ (घाटा रोकने) और ‘बुक प्रॉफिट’ (मुनाफा वसूलने) की रणनीतियों से अनजान होते हैं, जो एक प्रोफेशनल ट्रेडर के लिए बुनियादी मंत्र हैं।

इसके अलावा, इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रांजेक्शन कॉस्ट यानी सौदे की लागत भी काफी ज्यादा आती है, जो छोटे मुनाफे को निगल जाती है। रिटेल निवेशकों को पूरे दिन स्क्रीन के सामने बैठकर बाजार की हर धड़कन पर नजर रखनी पड़ती है, जिसके लिए बहुत समय और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है।

एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग का बढ़ता दायरा और XTX मार्केट्स की छलांग

जहाँ एक तरफ आम निवेशक जानकारी के अभाव में नुकसान उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक से लैस ‘एल्गोरिद्मिक फर्म्स’ बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। इसका ताज़ा और सबसे सटीक उदाहरण एलेक्जेंडर गेर्को की कंपनी ‘XTX मार्केट्स’ है। जहाँ रिटेल ट्रेडर छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव में उलझे रहते हैं, वहीं लंदन स्थित इस कंपनी ने 2025 में यूरोपीय इक्विटी ट्रेडिंग में सीधे ग्राहकों के साथ व्यापार करते हुए वॉल्यूम में 50% का भारी उछाल दर्ज किया है।

यह उछाल दर्शाता है कि बड़े निवेशक अब शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय एल्गोरिद्मिक फर्मों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। XTX मार्केट्स ने 2025 में कुल 177 बिलियन यूरो (लगभग 212 बिलियन डॉलर) का कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया।

बाजार की अस्थिरता: किसी के लिए जोखिम, किसी के लिए अवसर

इंट्राडे ट्रेडिंग का पूरा खेल ‘अस्थिरता’ पर टिका है। रिटेल निवेशक अक्सर भारी अस्थिरता में घबराकर गलत फैसले लेते हैं, लेकिन XTX जैसी फर्में इसी अस्थिरता को अवसर में बदल देती हैं। अप्रैल महीने में जब अमेरिकी टैरिफ (US Tariff) से जुड़े झटकों ने वैश्विक बाजार को हिला दिया था, तो जहाँ आम निवेशक सहमे हुए थे, वहीं XTX ने पहली बार 1 बिलियन यूरो प्रतिदिन से अधिक का औसत वॉल्यूम दर्ज किया।

सामान्य दिनों में भी, अपने यूके और यूरोपीय ‘सिस्टमैटिक इंटरनलाइज़र्स’ (Systematic Internalizers) के माध्यम से कंपनी का दैनिक औसत 693 मिलियन यूरो रहा। यह एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ फर्में ग्राहकों के खरीद-बिक्री के ऑर्डर को स्टॉक एक्सचेंज पर भेजने के बजाय अपनी ही किताबों (Books) में मैच करती हैं। यह तकनीक और पूंजी का वह स्तर है जहाँ तक पहुँचना एक आम डे-ट्रेडर के लिए असंभव है।

मुनाफे और जोखिम का गणित

इंट्राडे ट्रेडिंग के समर्थक अक्सर दलील देते हैं कि यह कम पूंजी में ‘लीवरेज’ और ‘मार्जिन’ के जरिए बड़ा मुनाफा कमाने का मौका देती है और बाज़ार को लिक्विडिटी (तरलता) प्रदान करती है। लेकिन यह सिक्का का केवल एक पहलू है। सच यह है कि जिस लीवरेज को फायदे का सौदा माना जाता है, वही अनुभवहीन हाथों में बर्बादी का कारण बन जाता है।

वहीं दूसरी ओर, XTX जैसी संस्थागत फर्में बाजार के हर डेटा पॉइंट का विश्लेषण करने के लिए सुपरकंप्यूटर्स और जटिल एल्गोरिदम का उपयोग करती हैं, जिससे उनका जोखिम प्रबंधन रिटेल निवेशकों की तुलना में कहीं अधिक सटीक होता है। इसलिए, वित्तीय सलाहकार अक्सर खुदरा निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे इंट्राडे के जोखिम भरे खेल से दूर रहें और लंबी अवधि के निवेश यानी ‘इन्वेस्टिंग’ पर ध्यान दें, जहाँ पूंजी सुरक्षित रहने और रिटर्न मिलने की संभावना ऐतिहासिक रूप से अधिक होती है।