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जड़ी बूटी दिवस के रूप में मना बालकृष्ण जी का 46 वाँ जन्मोत्सव

नालन्दा से डीएसपी सिंह

स्थानीय पतंजलि चिकित्सालय में शनिवार को आचार्य श्री बालकृष्ण जी का 46 वाँ जन्मोत्सव जड़ी बूटी दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पतंजलि योग समिति के जिलाध्यक्ष रामजी प्रसाद यादव ने की। जबकि संचालन कोषाध्यक्ष नरेश कुमार सिन्हा ने किया.

इस जन्मोत्सव में पतंजलि योग समिति के प्रदेश संरक्षक उदय शंकर प्रसाद ने भी मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की.मौके पर उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद को देश दुनिया में फैलाया है.आयुर्वेद के माध्यम से किसानों को समृद्धि और जनता को लाभ मिले और यही आचार्य बालकृष्ण जी का आज तक प्रयास है.भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा योग आयुर्वेद को पतंजलि योगपीठ ने पूरे विश्व में फैलाया और वैज्ञानिक स्तर पर सम्मान दिलाया.ऋषि चरक की विरासत के वाहक श्रद्धेय आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने वर्षों तक कठोर तप, साधना व संघर्ष करके हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों एवं जंगलों में भ्रमण करते हुए जड़ी बूटियों के दुर्लभ खजानों का संकलन तथा अनेक प्रयोगों का प्रामाणिक वर्णन किया है.बालकृष्ण जी ने आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दी है.

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मीडिया प्रभारी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हुआ। इनकी माता का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय बल्लभ है. उन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार-प्रसार का कार्य करते रहे हैं.उनका जन्म दिवस पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े लोग ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में आज मनाते हैं.उन्होंने कहा कि एक महान संत आचार्य बालकृष्ण ने संसारभर में जड़ी बूटियों की खोज कर आयुर्वेद को पुन: जीवित करने का कार्य कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है.आने वाली पीढ़ियां युगों-युगों तक आचार्य जी को आयुर्वेद के महान विद्वान के रूप में स्मरण करेंगी.उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी लगाओ और आयुर्वेद से जीवन बचाओ.उन्होंने कहा कि हम इस उद्देश्य से पेड़ न लगाएं कि हम ही उनकी छाया में बैठेंगे.हम भी किन्हीं लोगों द्वारा लगाए गए वृक्षों की वजह से जीवन जी रहे हैं.

आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद केंद्र के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य किया है.आचार्य श्री बालकृष्ण ने आयुर्वेद से संबंधित कई पुस्तकों की भी रचना की है, उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य, आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्य, भोजन कौतुहलम्, आयुर्वेद महोदधि, अजीर्णामृत मंजरी इत्यादि है.आचार्य बालकृष्ण ने शोध के क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया है अब तक 41 शोध पत्र लिख चुके हैं.सभी शोधपत्र योग, आयुर्वेद और दवाइयों से संबन्धित हैं.आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, उनके द्वारा बताए जाने वाले छोटे-छोटे घरेलू नुस्खों से लोगों को बहुत लाभ मिल रहा है.


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उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 23 अक्टूबर 2004 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम के द्वारा सम्मानित किया गया.मौके पर लोगों के बीच जड़ी-बूटी के पौधों का वितरण किया गया, जिसमें गिलोय, येलोवेरा, तुलसी, नीम, पत्थर चट्टा, जामुन, चीरेता, दमबेल आदि का पौधा और बीज वितरित किया गया.

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इस अवसर पर राज्य प्रभारी अरुणेश कुमार, फिल्मकार एसके अमृत, पतंजलि चिकित्सालय प्रभारी रंजना सिन्हा,योग शिक्षका अंशू सिंह, धन्नू कुमार, जितेंद्र कुमार, शशिशेखर प्रसाद सिंह, योग शिक्षका संगीता आर्या, रागिनी आर्या, सुशीला कुमारी, मंशा भर्तीप्रेमचंद प्रसाद,मुकेश कुमार, राजकुमार इत्यादि लोग उपस्थित थे.


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