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नीतीश कुमार रेलवे के निजीकरण के हैं खिलाफ

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बिहार के मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार ने रेलवे में निजीकरण के खिलाफ हैं. हालांकि कि उन्होंने यह भी कहा है कि वह रेलवे की कुछ सेवाएं ‘पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप’ यानी पीपीपी मोड से भले ही शुरू की जाएं लेकिन नियंत्रण सरकार का होना चाहिए. नीतीश कुमार ने यह बात सोमवार को पटना में पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत में कही.

नीतीश ने कहा कि मैं रेल मंत्री रहा हूं इसीलिए अपने अनुभव के आधार पर यह कह रहा हूं. उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे में किसी खास कार्य को पीपीपी मोड में कराना अलग बात है पर, इसका नियंत्रण सरकार के पास ही होना चाहिए. पांच जुलाई, 2019 को संसद में पेश बजट पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में रेलवे का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि बजट में रेलवे की योजनाओं को पूर्ण करने के लिए जन-निजी-भागीदारी के तहत राशि उगाही की बात कही गई है. केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए कि इससे यह संदेश न जाए कि रेलवे का निजीकरण किया जाएगा.

आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने कहा कि जब वो रेल मंत्री थे तब केंद्र सरकार अधिकांश सार्वजनिक कंपनियों को बंद कर रही थी तब उन्होंने भारतीय रेलवे में 2 नए निगम एक IRCTC और दूसरा रेल विकास निगम का गठन किया था. जिसके तहत कई नई परियोजनाएं शुरू की गई थी और नीतीश का मानना है कि रेलवे के परिचालन में कई सुविधाओं को आप पीपीपी मोड में दे सकते हैं लेकिन रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए.

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