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धानों की ढुलाई में फंसे 7 अफसर,अब उनपर चलेगा केस

बिहार में 2012-13 में हुए बहुचर्चित धान खरीद घोटाला मामले में बिहार प्रशासनिक सेवा के सात पदाधिकारियों के खिलाफ सरकार ने मुकदमा चलाने का फैसला लिया है. बिहार सरकार ने इससे सम्बन्धित आदेश जारी कर दिया है. दरअसल विधि विभाग द्वारा पूरे मामले की समीक्षा के बाद इन सभी अधिकारियों को दोषी पाया गया है. इन पर मुकदमा चलाने के अलावा पैसे की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू करने की सरकार ने अनुमति दे दी है.

जांच में इन पदाधिकारियों द्वारा 25 से लेकर 30 करोड़ रुपये मूल्य के धान चावल का गबन करने का आरोप सत्य पाया गया है. यह सभी आरोपी अफसर फिलहाल राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात हैं. इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ दूसरे अफसर भी रडार पर आ सकते हैं. ऐसे सभी दूसरों की पदाधिकारियों पर भी केस दर्ज किए जाने का फैसला ले लिया गया है. जिन अधिकारियों पर मुकदमा चलेगा उन पर यह आरोप है कि स्थानीय राइस मिलर के साथ मिलकर सभी ने हजारों टन चावल गायब कर दिया है.

जांच में सामने आया था फर्जीवाड़ा

हैरान कर देने वाली बात है कि चावल की ढुलाई कागज पर तो कर दी गई, इसके लिए वाहनों के नंबर तक दे दिए गए लेकिन जब जांच की गई तो पता चला कि पूर्वी चंपारण, गया समेत विभिन्न जिलों में ट्रक की बजाय टेंपो और ऑटो और बाइक के नंबर पर चावल की ढुलाई की गई. सैकड़ों क्विंटल चावल का ट्रांसपोर्टेशन गलत नंबरों के आधार पर किया गया था. राइस मिलों में कुटाई के लिए जितना धन जमा करना था उससे आधा ही या फिर चौथाई भाग ही धान हकीकत में जमा किया गया लेकिन कागजों पर इसे गलत ट्रक संख्या और पूरी मात्रा के साथ दिखा दिया गया.

पहले भी कई जा चुके हैं जेल
सरकारी गोदाम की बजाय इन चावलों को बाजार में ही बेच दिया गया. इस मामले में पहले भी कई राइस मिल के मालिक जेल जा चुके हैं. राज्य सरकार द्वारा जिन बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया है वो सभी राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक के पद पर तैनात थे और इस दौरान उन्होंने घपले और घोटाले को अंजाम दिया.

कार्रवाई की जद में आए अफसरों के नाम

बिहार सरकार के आदेश से घोटालेबाजों में खलबली मच गई है और कार्रवाई की जद में आने वाले अफसर भी बेचैन हो गए हैं. पूर्वी चंपारण के कमलेश सिंह, पूर्णिया के अजय कुमार ठाकुर, पूर्वी चंपारण के भानु प्रताप सिंह, गया के संतोष कुमार झा, कैमूर के अरविंद कुमार मिश्रा, पूर्वी चंपारण के अखिलेश्वर प्रसाद वर्मा, पूर्णिया के तत्कालीन जिला प्रबंधक अजय कुमार ठाकुर द्वितीय जैसे अफसरों के नाम सामने आए हैं.