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नीतीश सरकार के खिलाफ बालू मजदूर और नाविक संघ ने खोला मोर्चा, कहा याचना नहीं अब रण होगा

डीबीएन न्यूज/बिहटा(पंकज दुबे)-मनेर में बिहार बालू मजदूर एवं नाविक कल्याण संघ नावों का परिचालन शुरू कराने एवं मशीनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को लेकर आन्दोलन के बाद अब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बैठ गए. भूख हड़ताल पर बैठे बिहार बालू मजदूर एवं नाविक कल्याण संघ के महासचिव गोपाल सिंह ने कहा कि भाजपा के विनाशकारी चार साल और नीतीश के जनता के साथ गद्दारी के साथ गुजरा और दोनो ने अवसरवादी का परिचय दिया.

पूरे देश में गंभीर आर्थिक संकट है और इसके साथ बिहार भी बेरोजगारी का दंश से झेल रहा है. नीतीश ने आज तक एक सूई का कारखाना तक नहीं लगाया और जो प्रकृति प्रदत्त रोजगार थे उसे भी आमलोगों से छीनकर बिहार के नवधनाढ्यों और सामंत पूंजीपतियों को दे दिया.


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सोन नदी से लाखों मजदूरों का रोजी रोटी चलता था, डेहरी ऑनसोन से लेकर पटना के परेव तक बिहार के कोने-कोने से हजारों लोग यहाँ आकर रोजी-रोटी कमाते थे पर 2010 में नीतीश कुमार की वापसी के बाद सोन नदी पर बड़े पैमाने पर बालू उठाव के लिए मजदूरों की जगह मशीनों को लगवा दिया. इसके विरोध में बालू मजदूरों का आन्दोलन लगातार चलता रहा. तब 2013 में आंदोलन के दबाव में सरकार ने घोषणा किया कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मशीनों द्वारा बालू उठाव नहीं होगा पर इसे लागू करने का सवाल ज्यों का त्यों हीं रहा.

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साल 2017 में बालू माफियाओं को पकड़ने के नाम पर बालू खनन पर हीं रोक लगा दी जिससे सूबे की स्थिति चरमरा गई. फिर 2018 में जब बालू खनन चालू हुआ तो वही माफियाओं के हवाले कर दिया जो दिन-रात मशीनों से बालू निकासी कर आसपास के मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर कर रखा है.

कोईलवर, डोरीगंज, सुअरमरवा, हल्दी छपरा, ब्रम्हचारी, शेरपुर आदि गांवों में 2000 नाव चलते थे. प्रत्येक नाव पर बीस से तीस मजदूर काम करते थे यानी 50000 हजार मजदूरों के घर का चुल्हा बंद हो गया. ये तो चंद इलाकों की बात है. पूरे राज्य की बात करेंगें तो लाखों की तादाद में मजदूरों की रोजी-रोटी बालू माफियाओं ने छीन ली.

सरकार से हम लोग फरियाद कर अब हार चुके हैं. सरकार खुल्लम- खुल्ला ठेकेदारों संग मिलकर हमारे प्रकृतिक संसाधन और रोजगार को लूट रही है. इसलिए अब हमारे पास करो या मरो की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. जब तक सरकार इस ओर कोई पहल नहीं करती हमारा अामरण अनशन जारी रहेगा.

अनशन पर बैठे चन्देश्वर प्रसाद, विशाल कुमार आदि सैकड़ों बालू मजदूर समर्थन में जुटे रहें.


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