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कीर्ति आज़ाद के निलंबन के बाद बीजेपी नेताओं में मची दावेदारी की होड़

निशान्त झा. कीर्ति आज़ाद को पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद से बीजेपी में दावेदारी को लेकर खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है. चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और मौजूदा विधायक अभी से ही रेस में शामिल नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी कई बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. ऐसे में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से ही चर्चाए शुरू हो गई हैं. कीर्ति के निलंबन के बाद से ही कई विरोधी गुट यहां की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. बीजेपी के लिए आगामी चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करना जोखिम भरा होगा. बीजेपी से टिकट नहीं मिलने की सूरत में कीर्ति कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. वर्तमान में कीर्ति आज़ाद की पत्नी पुनम आज़ाद कांग्रेस में हैं. गौरतलब है कि कीर्ति के पिता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद भी पुराने कांग्रेसी नेता रहे हैं.


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दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के ब्राह्मण बहुल इस इलाके में ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं होने का फायदा राजद को मिलता रहा. लेकिन जब कीर्ति आजाद ने दरभंगा लोकसभा सीट से पहली बार अपनी किस्मत आजमाई, तो इन्हें ब्राह्मण सहित सभी जाति के लोगों का साथ मिला. लेकिन एक सांसद के रूप में ये अपने क्षेत्र के विकास के लिए कुछ खास नहीं कर पाए. अब जब पार्टी ने कीर्ति को निलंबित कर दिया है, तो ऐसे में मिथिला की राजधानी कहे जाने वाला शहर दरभंगा की सांसद सीट नेतृत्वविहीन सी हो गईं है. वहीं कीर्ति का पार्टी से निलंबन दूसरे नेताओं के लिए संजीवनी बन गया है. इधर कीर्ति के निलंबन के बाद से कई नेता अचानक जाग उठे हैं. कीर्ति के निलंबन के बाद से भाजपा के प्रवक्ता शहनवाज हुसैन तीन बार यहां आ चुके हैं. पारिवारिक कार्यक्रम के बहाने ही सही, उन्होंने दरभंगा से अपने प्रेम को जाहिर कर दिया है तो दूसरी ओर साबीर अली भी दरभंगा का दौरा कर चुके हैं. लोग सियासी मतलब यही निकल रहे हैं कि ये दोनों नेता भी दरभंगा में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं.

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इधर,मिथिलांचल की राजनीति में पिछले एक दशक से भी अधिक समय से सक्रिय जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा भी दरभंगा से ताल ठोकने के मूड में दिख रहे हैं. राजनीति में इनका पदार्पण भी बीजेपी के एमएलसी के रूप में ही हुआ था. इसके बाद धीरे-धीरे वे एमएलसी का टर्म पूरा करने के बाद जदयू में शामिल हो गए. वर्तमान में नीतीश कुमार द्वारा जदयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद ये पूरी तरह से एक्टिव नज़र आ रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हें भाजपा से नजदीकी और नीतीश कुमार के चेहेते होने का फायदा मिल सकता है. भाजपा के बड़े नेता अरुण जेठली से भी इनका व्यक्तिगत सम्पर्क है. वहीं दूसरे ओर चार टर्म से नगर विधायक रहे संजय सरावगी भी गुपचुप तौर पर बीजेपी चेहरे के रूप में अपनी उम्मीदवारी के लिए पार्टी के आलाकमान के संपर्क में हैं. चुनावी दावेदारी में गोपाल जी ठाकुर भी पीछे नहीं दिख रहे हैं,लेकिन गोपाल जी ठाकुर के लिए गले का घेंघ केंद्रीय मंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता अश्वनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे बन सकते हैं. बताया जा रहा है कि अर्जित अपनी नज़र दरभंगा लोकसभा सीट पर टिकाए हुए हैं. पार्टी के सूत्रों की माने तो अर्जित शाश्वत चौबे का भी नाम दरभंगा भाजपा से लोकसभा प्रत्याशी के रूप में आने लगा है.

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