Input your search keywords and press Enter.

बलात्कारियों के खिलाफ स्वाति मालीवाल की य़ह लड़ाई जारी रहनी चाहिए, कड़े कानून से ही बेटियाँ होंगी सुरक्षित

समस्तीपुर से कुणाल गुप्ता की खास खबर. देश में बच्चियों महिलाओं के साथ निरंतर घट रही बलात्कार और हत्या की घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर महिलाओं एवं पुरुषों का गुस्सा जायज  है. कई तरीकों से लोग इसका विरोध कर रहे है और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की लड़ाई में अपनी भागीदारी दे रहे है.

बलात्कार के ख़िलाफ़ कड़े कानून बनाने एवं 6 महीनों में बलात्कारी को फाँसी की सजा और उन्हें कड़ाई से लागू करने के लिए वे पिछले एक सप्ताह से आमरण अनशन पर हैं. उनकी हालत बिगड़ रही हैं. दिल्ली सहित कई प्रदेश के समाजिक संगठनों ने इस लड़ाई में वह स्वाति मालीवाल के साथ खड़ी है साथ ही कई महिलाएं सांकेतिक तौर पर भी उनका साथ देकर उनकी लड़ाई को ताकत दे सकती हैं.

जिन महिलाओं के लिये यह संभव नहीं, वे सियासत से ऊपर उठकर सोशल मीडिया पर ही उनके संघर्ष का समर्थन करें, और अपने परिवार दोस्तों को भी स्त्रियों के प्रति अन्याय और अमानवीयता के ख़िलाफ़ यह लड़ाई में शामिल करें. भारत में कई राजनीति दल नहीं चाहते कि बलात्कारियों के खिलाफ कोई कड़ा कानून बने क्योंकि करते भी खुद ही है. अगर कानून बना तो नुकसान भी इन्हें ही होगा. जब हम इन्हें कुर्सी पर बैठाते है तो ये हमारी बात क्यों नहीं मानेंगे.

जब कांग्रेस की सरकार थी तो मनमोहन सिंह चुप थे आज बीजेपी की सरकार है तो मोदी. सरकार बदली पर हालात नहीं समस्या जहाँ थी वही है. इस सरकार में तो बलात्कारियों को बचाने के लिये कुछ समर्थक तिरंगा झण्डा लेकर सड़कों पर उतर आई. युपी में तो बीजेपी के ही विधायक
रेप के आरोप लगे पुलिस शुरू में आरोपी को बचाते दिखी लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया पर युपी सरकार की आलोचनाओ के बाद आरोपी विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया.

Loading...

सोशल मीडिया की बात करें तो बीजेपी की सरकार ने बेटी बचाओ का नारा दिया था और सोशल मीडिया ने बीजेपी द्वारा बलात्कारी बचाओ का नारा दिया गया.और कई मुहल्लों वासियों ने अपने गली में बैनर व पोस्टर भी लगवा दिये थे की इस गली में बेटियाँ रहती है बीजेपी नेता ना आये.

चूँकि यह जाँच का विषय है कि पर आज जिस समाज में हम रह रहे है वहाँ बेटियों को किस नजर से देखा जाता है आप भली भाँति जानते है. हमें एक ऐसे समाज की जरूर है जिसमें सभी को एक समान हक दिया जाये बेटे बेटियों में फर्क नहीं किया जाये.

खेल के क्षेत्र में भी लड़कियाँ लड़कों से आगे नहीं है तो फिर क्यों बेटियों को बेटों से कम आंकते है आप? सोचने वाली बात है सोचिये विचार कीजिये और समझ में ना आये तो अच्छे सलाहकार से मिल कर उनकी राय लीजिये फिर फैसला कीजिये की बलात्कारियों को फाँसी की क्यों नहीं होनी चाहिये ? दूसरे देश में बलात्कारियों को बीच चौराहे पर कई तरह के सजा दी जाती है तो अपने देश में क्यों नहीं.

मैं बिहार के समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय शहर का रहने वाला हूँ और कड़े कानून बनाये जाने के पक्ष में भी कुछ दिन पहले ही अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कैंडिल मार्च एवं मौन जुलूस निकाला था जिसमें सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया और बलात्कारियों को फाँसी देने की बात कहीं. बालात्कारियो के खिलाफ य़ह लड़ाई जारी रहनी चाहिए इसे कमज़ोर मत होने दें और इसमें अपने हिस्से का योगदान ज़रूर दें!


Widget not in any sidebars

One Comment

  • Md Aashif iqwal says:

    देश में बच्चियों एवं महिलाओं के साथ बढ़ते बलात्कार और हत्या की घटनाओं पर आपका यह विश्लेषण काफी सराहनीय है , ऐसे दरिंदों के लिए इतनी कठोर कानून एवं सजा दी जाए की फिर से जब ऐसी हरकत करने की वह सोचे तो उसकी आत्मा कांप उठे ! हम सभी युवाओं एवं स्त्रियों को इसके खिलाफ आवाज उठाने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए !

    _( मो0 आसिफ )_

Leave a Reply

Your email address will not be published.