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SC-ST कर्मचारियों के लिए सीएम नीतीश ने लिया बड़ा फैसला, प्रमोशन में अब फिर मिलेगा आरक्षण

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राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) को पदोन्नति में आरक्षण देने का फैसला लिया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आशय का संकल्प जारी कर दिया. संकल्प में यह स्पष्ट किया है कि इसका असर पिछले दो वर्षों के दौरान मूल कोटि की वरीयता के आधार पर दी गई प्रोन्नतियों पर नहीं होगा. विदित हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी प्रोन्नति में आरक्षण की वकालत करते रहे हैं. और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार का यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है.


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विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने पांच जून को केंद्र सरकार को कानून के अनुसार कर्मचारियों की निश्चित श्रेणी में प्रमोशन में आरक्षण देने की अनुमति दी थी. इसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने नौकरियों में प्रमोशन को लेकर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को तब तक बरकरार रखने को कहा, जब तक कि इस मामले में संविधान पीठ कोई अंतिम फैसला न सुना दे.

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पिछले दिनों प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा काफी चर्चे में रहा था. विपक्ष ने बीजेपी पर इस ऐक्ट के प्रावधानों को कमजोर करने की साजिश का आरोप भी लगाया था. इस पर बीजेपी को सफाई देनी पड़ी थी कि आरक्षण और दलित समुदाय की सुरक्षा से जुड़े अन्य नियम बने रहेंगे. वहीं, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में राहत नहीं देता है तो सरकार अध्यादेश लाएगी.

बता दें कि प्रोन्नति में अनुसूचित जाति के कर्मियों को 16 और अनुसूचित जनजाति के कर्मियों को एक फीसदी आरक्षण मिलेगा. कोटा नहीं होने की स्थिति में केस टू केस की समीक्षा के बाद प्रोन्नति दी जाएगी, ताकि आरक्षित वर्ग के कर्मियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके. इस संकल्प के लागू होने के बाद वरीयता का आधार मूल कोटि न होकर फीडर कैडर होगा.

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