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CM नीतीश ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, की यह गुजारिश…

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न्यूज़ डेस्क: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर ये गुजारिश की है कि स्व. डॉ. राममनोहर लोहिया को भारत रत्न से सुशोभित किया जाए. साथ ही पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है कि 12 अक्टूबर को डॉ. लोहिया के जन्मदिवस भारत रत्न सम्मान की घोषणा की जाए.

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने डॉ. राममनोहर लोहिया को स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम योद्धा, विचारक, देशज समाजवादी और प्रखर राजनेता बताया है. नीतीश कुमार ने कहा कि उनके महान योगदान से संपूर्ण देश परिचित है.


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मुख्यमंत्री ने डॉ. राममनोहर लोहिया को याद करते हुए लिखा है कि जब हमारा देश आजाद हुआ तो सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए एक अलग पार्टी के गठन का विचार आया. इसके तहत डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण समेत अधिकतर समाजवादी नेताओं ने सत्ताधारी दल कांग्रेस से संबंध विच्छेद कर लिया था.

निर्धारित नीति के अनुसार आजादी के बाद जनोन्मुखी नीतियों के लिए सड़क व संसद में संघर्ष की रास्ता अख्तियार किया गया. नेपाल को आजाद कराने और लोकतंत्र स्थापित करने हेतु डॉ. लोहिया और जेपी के नेतृत्व में सफल आंदोलन चला. मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में गोवा हवाई अड्डे का नामकरण डॉ. राममनोहर लोहिया हवाई अड्डा किए जाने की भी मांग की है.

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मुख्यमंत्री ने कहा है कि संसद में पंडित नेहरू की सरकार के विरुद्ध पहले अविश्वास प्रस्ताव व सिद्धांतनीति पर प्रखर आलोचना करते हुए डॉ. लोहिया ने समूचे विपक्ष को गैर कांग्रेसवाद की धुरी पर इकट्ठा किया और अपनी मृत्यु के पहले 1967 में कई राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें बनवायी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें एक दार्शनिक के तौर पर भी याद किया है और कहा है कि 20वीं सदी के पांचवें दशक में नदियों की सफाई, हिमालय बचाओ, छोटी मशीन की टेक्नोलॉजी, विश्व सरकार की अवधारणा तथा शोषण व विषमता के सात कारणों को दूर करने के लिए डॉ. लोहिया ने सप्तक्रांति का नारा दिया था।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छता से जोड़ते हुए कहा है कि गांव में महिलाओं के लिए दरवाजा बंद शौचालयों के निर्माण की मांग तत्कालीन सरकार से डॉ. लोहिया लगातार करते रहे. पंडित नेहरु के घोर विरोधी रहे डॉ. लोहिया ने यहां तक कहा था कि अगर पंडित नेहरू सभी गांवों में महिलाओं के लिए शौचालय बनवा दें तो मैं उनका विरोध करना बंद कर दूंगा.

इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र की औरतों के लिए चिमनीयुक्त, धुआंमुक्त चूल्हों की तकनीक को प्रत्येक रसोई में पहुंचाने की उनकी मजबूत आवाज़ संसद में और सड़कों पर लगातार गूंजती रही.

स्वयं अंग्रेजी व जर्मन भाषा के विद्वान होकर भी मातृभाषा को लोककार्यों व शिक्षा में प्रोत्साहन व प्राथमिकता देकर अंग्रेजी को सिर्फ ज्ञानार्थ ऐच्छिक भाषा का दर्जा दिए जाने के लिए इन्होंने अंग्रेजी हटाओ आंदोलन पूरे भारत में संचालित किया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. राममनोहर लोहिया को याद करते हुए प्रधानमंत्री को लि्खी चिट्ठी में सिलसिलेवार ढंग से सभी बातों का उल्लेख किया है.


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