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इतिहास बदलने वाले हिंदुस्तान के चर्चित गुरुओं का काफिला को जानिये,ये कौन हैं

डीबीएन न्यूज डेस्क -डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन- डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तानी में हुआ था. वह न सिर्फ महान शिक्षक थे बल्कि एक महान दार्शनिक भी थे. वह भारत के पहले उप राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे. उनको भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था. उनका निधन 86 साल की उम्र में 17 अप्रैल, 1975 को हुआ.

ए .पी.जे.अब्दुल कलाम- भारत के ‘मिसाइल मैन’ और भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने हमेशा चाहा कि उनको एक अच्छे शिक्षक के तौर पर याद किया जाए. पढ़ाने का उनको जुनून था और उनका निधन भी आईआईएम शिलॉन्ग में पढ़ाते समय हुआ.</p


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आनंद कुमार- श्री आनन्द कुमार बिहार के जाने-माने शिक्षक एवं विद्वान हैं. बिहार की राजधानी पटना में सुपर-30 नामक आईआईटी कोचिंग संस्थान के संस्थापक हैं. वह रामानुज स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स नामक संस्थान का भी संचालन करते हैं. उनके संस्थान में गरीब और बेसहारा बच्चों को मुफ्त में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जाती है और सुपर-30 अपनी अद्वितीय सफलता के लिए प्रसिद्ध है. वर्ष 2009 में पूर्व जापानी ब्यूटी क्वीन और अभिनेत्री नोरिका फूजिवारा ने सुपर 30 इंस्टिट्यूट पर एक डाक्युमेंट्री फिल्म भी बनाई थी. इसी वर्ष नेशनल जियॉग्राफिक चैनल द्वारा भी आनंद कुमार के सुपर 30 का सफल संचालन एवं नेतृत्व पर डाक्युमेंट्री फिल्म बनाई गई थी. सुपर 30 इंस्टिट्यूट की शुरुआत सन 2003 में हुई थी. इस वर्ष सुपर 30 के 30 में से 18 विद्यार्थी आईआईटी में सफल हुए थे. 2004 में यह संख्या 22 और सन 2005 में यह 26 हो गई.आगे ये कारवां ऐसे ही बढ़ते गया.

आरके श्रीवस्तवा – वहीं बिहार के गुरु आरके श्रीवास्तवा बहुत कम समय मे अपने पढ़ाने की कला से पूरे देश मे पहचान बना चुके है. जिनके अनेको स्टूडेंट्स देश विदेश में नाम रौशन कर रहै हैं.आप लोग आरके श्रीवास्तवा के शिष्य छोटा- सा बालक गूगल बॉय कौटिलया पंडित का नाम तो सुना ही होंगा जो अपने टैलेंट से पूरे विश्व को चकित कर दिया है. गुरु आरके श्रीवास्तवा ने सैकड़ो आर्थिक रूप से गरीब बच्चो को निःशुल्क शिक्षा देकर उन्हें आईआईटी, एनआईटी, एनडीए, स्टेट इंजिनीरिंग की प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाकर उन स्टूडेंट्स के सपने को पंख लगाया. आरके श्रीवास्तवा के द्वारा चलाया जा रहा अभियान आर्थिक रूप से गरीबो की नही रुकेगी पढ़ाई के तहत सब्जी विक्रेता, गरीब किसान, पान विक्रेता,मजदूर आदि के बच्चे निःशुल्क शिक्षा ग्रहण कर आज इंजिनियर बन बड़े कंपनियों मे ऑफिसर के पद पर कार्यरत है.

आरके श्रीवास्तवा बहुत कम समय मे देश मे अपने मैथमेटिक्स का जादू बिखेर चुके है.चुटकले सुनाकर पढ़ाते हैं.
गणित के मशहूर शिक्षक आर के श्रीवास्तवा सरल तरीके से गणित पढ़ाने के लिए जाने जाते हैं.उनकी पढ़ाई की खासियत यह है कि वे बहुत ही स्पष्ट और सरल तरीके से छात्रों को समझाते हैं.सामाजिक सरोकार से गणित को जोड़कर, चुटकुले बनाकर सवाल हल करना मैथमेटिक्स गुरु श्रीवास्तवा की पहचान है. आर के श्रीवास्तव को शाहाबाद जिले के लोग दूसरे वशिष्ठ नारायण के रूप में जानते हैं.

वे गणित को हौवा या डर होने की बात को नकारते हैं. वे कहते हैं कि यह विषय सबसे रुचिकर है.इसमें रुचि जगाने की आवश्यकता है.मैथमेटिक्स गुरु के नाईट क्लास की धूम पूरे देश मे मचा है.आर के श्रीवास्तव के नाइट क्लास के रूप मे लगातार पूरे 12 घंटे बच्चों को शिक्षा देने की मुहिम अब देशव्यापी रूप लेने लगा है. देश के विभिन्न जगहों के शिक्षक अपने शैक्षणिक संस्थानो मे भी नाइट क्लास के प्रारूप को अपना रहे है. पिछले दिनों विश्व प्रसिद्ध गुगल बॉय हरियाणा निवासी कौटिल्य पंडित को भी आर के श्रीवास्तव ने पूरे लगातार 4 रात गणित का गूढ़ सीखाया.

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रोहतास निवासी आर के श्रीवास्तव के नाइट क्लास को देखने अभिभावक भी आते है कि उनका बेटा एक घंटे भी घर पर ठीक से पढ़ने नही बैठता उसको आखिर यहां पूरे रात कैसे आर के श्रीवास्तव बैठाकर गणित का गूढ़ सिखाते है. आर के श्रीवास्तव को देश के विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक संस्थाएँ गेस्ट फैक्लटी के रूप मे अपने यहाँ शिक्षा देने के लिए बुलाती है. शिक्षक भी बच्चों के साथ आर के श्रीवास्तव के क्लास लेने के तरीकों को समझने के लिए क्लास मे बैठते है कि कैसे पूरे रात अनुशासन मे बच्चों को पढ़ाया जा सकता है.क्लास देखकर बच्चे सहित शिक्षक भी श्रीवास्तव को धन्यवाद देते है. पढ़ाने की ऐसी कला सारे शिक्षकों मे आ जाये तो कोई बच्चा शिक्षा से अपने को दूर नही कर पायेगा और सफलता उसके कदम चूमेगी.

मैथमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तवा कहते है कि अगर किसी फॉर्मूला से आप सवाल को हल कर रहे हैं तो उसके पीछे छुपे तथ्यों को जानिए.क्यों यह फॉर्मूला बना और किस तरह आप अपने तरीके से इसे हल कर सकते हैं. वे बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गणित में बहुत अधिक रुचि थी जो नौंवी और दसवी तक आते-आते परवान चढ़ी.

 

मैथमेटिक्स गुरु की कई खबरे भी राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय सभी दैनिक अखबारों मे छप चुकी है .कई राष्ट्रीय स्तर के अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुके है.आर के श्रीवास्तवा की बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है. परन्तु अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर है.वे कहते हैं कि मेरे जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते.
बिहार राज्य के रोहतास जिले के छोटे सा शहर बिक्रमगंज जहाँ आर के श्रीवास्तवा के शैक्षणिक आँगन मे तैयार हो रहे वंडर किड्स. यहाँ जिस बच्चो से बात करोगे वह कुछ न कुछ अलग ही मिलेगा.पहली कक्षा का बच्चा फर्राटेदार अंग्रेजी, पांचवी कक्षा का बच्चा दसवी का मैथ और दसवी कक्षा का बच्चा न जाने क्या क्या. यूँ कहे तो मैथमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तवा के शैक्षणिक आँगन में हर बच्चा प्रतिभा से भरा है तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी.

यहाँ बच्चो के पढ़ाने का नजारा अलग होता है.प्रतिनदिन कम से कम दर्जनों बच्चो को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया जाता है. फिर दुनिया भर के श्रेठ उदाहरण गिनाए जाते है, समझाया जाता है हर किसी मे प्रतिभा है कुछ भी असम्भव नही.देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर बिहार के चर्चित मैथमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तवा बताते है कि बच्चो में पिटाई का नही बल्कि प्रेरणा का हथियार इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है बच्चे कुछ नया सीखने के लिए जुनून की हद तक जा रहे है.

स्वामी दयानंद गिरि- स्वामी दयानंद गिरि और पीएम मोदी का रिश्ता बहुत पुराना था। सोलह साल पहले भी मोदी ऋषिकेश के दयानंद आश्रम में आए थे। जब-जब मोदी के सामने कोई मुश्किल समस्या आई, तब-तब उन्होंने गुरु से ज्ञान लिया। 86 साल के स्वामी दयानंद गिरि की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे वेदांत के जरिए आज की समस्याओं का भी निदान निकाल लेते थे. यही वजह है कि मोदी के जीवन पर अपने गुरु का गहरा प्रभाव है. स्वामी दयानंद गिरि ऋषिकेष में दयानंद सरस्वती आश्रम और कोयंबटूर में अर्श विद्या गुरुकुलम के संचालक थे. उनके आश्रम से देशभर में सौ से ज्यादा शिक्षा के केंद्र चलाए जाते हैं. शिक्षा और सेहत के लिए बेहतरीन काम करने के चलते दयानंद आश्रम को साल 2005 में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से अवॉर्ड भी मिल चुका है.

स्वामी दयानंद सरस्वती- 7 अप्रैल, 1875 को जन्मे दयानंद सरस्वती ने आर्या समाज की स्थापना की थी. उन्होंने वैदिक विचारधारा को जिंदा किया। डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णनन और श्री ऑरबिंदो ने उनको ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ कहा.

रामकृष्ण परमहंस-उनका जन्म 18 फरवरी, 1836 को हुआ। उनके मुख्य शिष्य स्वामी विवेकानंद ने उनके नाम पर ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की.

शंकराचार्य- शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ था। उन्होंने उस समय प्रचलित धार्मिक अंधविश्वासों को दूर किया। वह एक बार जो पढ़ लेते थे, हमेशा याद रखने की उनके अंदर विलक्षण प्रतिभा थी.


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