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कोरोना अभी गया भी नहीं और मंकीपॉक्स ने दिया दस्तक ,हो जाये सावधान

मंकीपॉक्स की चपेट में आए देशों की संख्या 15 दिन के अंदर ही बढ़कर 15 हो गई है. कन्फर्म केसों का आंकड़ा करीब 100 बताया जा रहा है. भारत में हालांकि अभी तक मंकीपॉक्स का कोई केस नहीं मिला है, लेकिन सतर्कता काफी बढ़ा दी गई है. इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में 28 बेड का एक वॉर्ड मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया है. एयरपोर्ट पर ऐसे लोगों की जांच शुरू कर दी गई है, जो मंकीपॉक्स प्रभावित देशों की यात्रा करके आए हैं. महाराष्ट्र के अलावा कई और राज्यों में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं.

ये कवायद विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से उस चेतावनी के बाद की जा रही है, जिसमें उसने कहा है कि जिन देशों में मंकीपॉक्स का संक्रमण नहीं फैला है, वहां इसके केस सामने आ सकते हैं. केंद्र सरकार के निर्देश के बाद नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने जारी एडवाइजरी में कहा था कि भारत में मंकीपॉक्स का केस मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है. स्वास्थ्य एजेंसियां ऐसे लोगों पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों के अंदर विदेश यात्रा की है या ऐसा करने वालों के सीधे संपर्क में आए हैं और उनमें रेशैज दिख रहे हैं. ऐसे लोगों की सूचना तुरंत दी जाना चाहिए और उन्हें बाकी लोगों से अलग करके निर्धारित अस्पतालों में आइसोलेट किया जाना चाहिए.

इसी के मद्देनजर मुंबई में चिंचपोकली के कस्तूरबा अस्पताल में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों के लिए 28 बेड रिजर्व कर दिए गए हैं. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के वार्ड 30 में पिछले कुछ समय से कोरोना के मरीजों को रखा जा रहा था. उससे पहले स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट करने में इस वार्ड का इस्तेमाल होता था. बीएमसी की एग्जिक्यूटिव हेल्थ ऑफिसर डॉ. मंगला ने TOI को बताया कि मुंबई में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सूचित कर दिया गया है कि अगर उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की जानकारी मिले, जिसे मंकीपॉक्स होने का शक हो तो तुरंत कस्तूरबा अस्पताल के लिए रेफर करें. ऐसे सभी संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की जांच के लिए पुणे के नैशनल वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट में इंतजाम किए गए हैं.

बता दें कि मंकीपॉक्स मूल रूप से जानवरों में फैलने वाली बीमारी है. 1958 में सबसे पहले एक बंदर में इसे देखा गया था. इंसान में सबसे पहला संक्रमण 1970 में मिला था. यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल बीमारी है. ये संक्रमित जानवर या इंसान के संपर्क में आने से फैलती है. अगर कोई संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर कटे-फटे हिस्सों के संपर्क में आ जाए या उसकी आंख, नाक या मुंह से निकले द्रव को छूकर अपने शरीर में पहुंचा दे या फिर कुछ देर तक उसके सामने खड़ा रहे तो भी ये बीमारी घेर सकती है.

WHO के मुताबिक, मंकीपॉक्स से संक्रमित हर 10वें व्यक्ति की मौत हो सकती है. इसके मरीजों में बुखार, दर्द और थकावट जैसे लक्षण दिखते हैं. शरीर पर पहले लाल चकत्ते और फिर फोड़े बन जाते हैं. चेचक जैसे दाने उभर आते हैं. समलैंगिक सेक्स के जरिए भी ये बीमारी चपेट में ले सकती है. इस बीमारी का असर आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक रहता है. ज्यादातर मरीज खुद ठीक हो जाते हैं. मंकीपॉक्स बीमारी बरसों से मौजूद है, लेकिन पिछले कुछ समय में इसके वायरस में हुए बदलावों के बाद ये इंसानों में तेजी से फैल रही है. इससे वैज्ञानिक भी हैरान हैं.