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नालंदा में धूमधाम से मनाया गया डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन


नालन्दा से डीएसपी सिंह. नालन्दा जिला मुख्यालय के मध्य विद्यालय ककड़िया के प्रांगण में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 130 वीं जन्म दिवस को “शिक्षक दिवस” के रूप में उल्लास पूर्वक प्रधानाध्यापक शिवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में मनाई गयी। बच्चों व शिक्षकों ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक व शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते व श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए बिहार अराजपत्रित प्रारम्भिक शिक्षक संघ के राज्य परिषद सदस्य राकेश बिहारी शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि राधाकृष्णन जी भारतीय संस्कृति के उन्नायक तथा विज्ञानी हिन्दू विचारक थे। वे 40 वर्षों तक एक आदर्श शिक्षक के रूप में व्यतित किये तथा वे अपने आप को जीवन भर शिक्षक ही मानते रहे। वे समाज के आदर्श पुरुष, एक कुशल राजनेता, तत्ववेता, महान दार्शनिक, धर्मशास्त्री, युगद्रष्टा तथा बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ-साथ ही देश कि संस्कृती को प्यार करने वाले व्यक्ति थे।

इनकी ख्याति भारत के राष्ट्रपति के रूप में कम और एक कर्मठ विद्वान शिक्षक के रूपमें ज्यादा जानी जाती हैं। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। इनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से देश में शिक्षा दी जाय तो समाज कि अनेक बुराइयों को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के बजारीकरण का यह धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। शिक्षक शुलभ और सार्वजनिक शिक्षा देकर हमारे शिक्षक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के प्रति सही मायने में सच्ची श्रद्धा होगी। उन्होंने कहा कि जन्म दाता से ज्यादा महत्व शिक्षक का होता हैं क्यूंकि ज्ञान ही व्यक्ति को इंसान बनाता हैं जीने योग्य जीवन देता हैं। कोई भी व्यक्ति बिना किसी शिक्षक के पढाये बड़ा नहीं बन सकता।

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क्योंकि अगर हम चमन के फूल है तो शिक्षक बागवान है। शिक्षक ही वह इंसान है जो दुनिया को सन्मार्ग दिखता है। इसलिए हमें अपने गुरु को मान-सम्मान देना चाहिए। अगर हम इस दुनिया को रौशन करने के काबिल हुए है तो वह गुरु की कृपा से ही हुए है। शिक्षा ही मानवता का बोध कराती है। शिक्षा के बिना तो मानव जीवन पशु समान ही कहा गया है। किसी समय हमारे देश में शिक्षा गुरुकुल प्रणाली से होती थी। गुरु ही अपने आश्रमों में गुरुकुल तैयार करते थे तथा छात्रों को सब प्रकार की शिक्षा दिया करते थे।

इसीलिए तो गुरु को साक्षात ईश्वर माना गया है। उन्होंने कहा कि आज राधाकृष्णन जी हमारे बीच आज नहीं हैं पर उनकी कीर्ति अक्षय है। मुक्ति और शांति की जो मशाल उनहोंने जलाई थी, वह भारत में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में आज भी उजाला कर रही है। अब वक्त बदल गया है, यह देश के हित में है कि हम अपने बच्चों को विद्यालयों में महापुरुषों, समाजसेवियों के योगदान और उनके संघर्ष की दास्तान बताएं जिससे उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सच्ची कहानी का ज्ञान हो सके।उन्होंने शिक्षक की महत्ता का विस्तापूर्वक वर्णन किया।

प्रधानाध्यापक शिवेंद्र कुमार ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षक वह नहीं,जो छात्रों के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठुसे, बल्कि आने वाले कल की चुनौतियों के लिए भी तैयार करें।

इस मौके पर बालसंसद के प्रधानमंत्री शुभम प्रकाश शर्मा ने कहा कि
शिक्षक समाज के शिल्पकार होते हैं, वे उन्नत समाज का निर्माण करते हैं। शिक्षक किसी भी देश की नींव होते हैं क्योंकि देश का विकास करने में शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

बालसंसद के शिक्षा मंत्री गुडिया कुमारी ने कहा कि शिक्षक ही देश के भविष्य के वास्तविक आकृतिकार होते है अर्थात् देश का उज्जवल भविष्य विद्यार्थियों के बेहतर विकास से ही संभव है।

इस दौरान शिक्षक सुरेश प्रसाद रजक, शिक्षक सच्चिदानंद प्रसाद, शिक्षिका पूजा कुमारी, शिक्षक अनुज कुमार, शिक्षक अरविन्द कुमार, सुरेश कुमार, छात्र-छात्रा गोलू कुमार, लक्ष्मण कुमार, प्रशांत कुमार, मोनी कुमारी, आरती कुमारी, चांदनी कुमारी, मेनका कुमारी, रिंकी कुमारी, मुश्कान कुमारी, माधुरी कुमारी,
काजल कुमारी, पवन कुमार, मुकेश कुमार आदि ने सम्बोधित किया तथा शिक्षकों को गुलदस्ता भेंट किया। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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