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बिहार के मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा में अधिकारियों की लापरवाही के कारण हर -घर नल- घर योजना फ्लॉप

डीबीएन न्यूज/नालन्दा(डीएसपी सिंह)-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले का मुख्यालय बिहार शरीफ में सात निश्चय योजनाओं में शामिल हर -घर, नल- जल योजना संबंधित अधिकारियों एवं कुछ बिचौलियों के कारण पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है.

बिहार के मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया था कि राज्य के हर घरों में पीने हेतु शुद्ध पेयजल पहुंचाऊंगा. हर -घर नल का जल योजना के तहत बिहार शरीफ शहर के 4 वार्डों को मिलाकर दो उच्य शक्ति का पंपिंग हाउस तथा एक जलमीनार बनाया गया है. पहला एक लाख लीटर क्षमता का जलमीनार वाला पंपिंग सेट सोगरा कॉलेज के पास बनाया गया है. दूसरा पंपिंग सेट अनुग्रह नारायण पार्क में बनाया गाया है. दोनों पंपिंग सेट का पाइप एक-दूसरे से जोड़ा गया है तथा इन मोहल्लों में पाइप बिछाकर घरों में कनेक्शन दे दिया गया है.


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कहा जाता है कि ठेकेदारों द्वारा घरों में कनेक्शन दिया गया है. कई ऐसे घर भी हैं जहां 2-2, 3-3, 4-4 कनेक्शन भी दे दिया गया है. इन पाइप कनेक्शनों में 1 मीटर तथा नल भी लगाना था परंतु 1 साल बीतने के बाद भी अब तक नल नहीं लगाया गया है. इसी हर -घर नल योजना वाले कनेक्शनों में मोटर लगाना कानूनन अपराध बनाया गया परंतु बिहार शरीफ नगर निगम की लापरवाही के कारण इन कनेक्शनों में मोटर लगा दिया गया है.

बताया जाता है कि दो माह पूर्व बिहार शरीफ नगर आयुक्त का कुछ अखबारों में बयान आया था कि हर घर नल -जल योजना के तहत बिछाये गए नए कनेक्शन में जो भी लोग मोटर लगाए हैं वो तत्काल हटा लें. अगर मोटर नहीं हटाते हैं तो जांच में पाए जाने पर जुर्माना वसूला जाएगा.परंतु नगर निगम द्वारा इन मोटरों को हटाने के लिए कोई पहल नहीं की जा सकी है जिसका नतीजा मुख्यमंत्री की अति महत्वकांक्षी योजना पर ग्रहण लगना शुरू हो गया है तथा अंदर गली में रहने वाले मोहल्ले के लोगों को पाइन का पानी नहीं मिलने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.

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बताया जाता है कि जब दोनों पंपिंग सेट चालू रहता है तो बिना मोटर के सहारे मकान के दो-तीन फ्लोर तक पानी अपने आप चढ़ जाता है.लेकिन नगर निगम के निकम्मेपन के कारण हर दिन मोटरों की संख्या बढ़ती जा रही है. वही दूसरी ओर अंदर के मोहल्लों में एक-एक बूंद पानी नलों से भी गिरना मुश्किल हो गया.

मिली जानकारी के अनुसार, सुबह 5:00 बजे से 9:00 बजे तथा दोपहर एक बजे से दो बजे तक तथा शाम में 5:00 बजे से 8:00 बजे तक पानी सप्लाई किया किया जाता है. इस दौरान मोटरों के चलने से अंदर मोहल्ले के घरों में पानी पहुंचना मुश्किल हो जाता है. जब इन मोटर वालों की टंकिया फुल होती है,तब जलापूर्ति मोटर बंद होने का समय हो जाता है.

लगता है कि बिहार में विकास कि गंगा बह रही है. अधिकारी एवं कर्मचारी नई योजनाओं में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं, ताकि उन्हें नई योजनाओं क़े कार्यों के बदले बंधी बंधाई कमीशन मिलती है. वहीं दूसरी ओर जनता की कठिनाइयों की ओर ध्यान इसलिए भी नहीं दिया जाता है ,इससे अधिकारियों को कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं होता है इसलिए आंख मूंदकर आराम से जनता द्वारा की गई शिकायतों को नजर अंदाज कर बैठे हुए रहते हैं.

बिहार शरीफ शहर के एक सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र कुमार ने कहा कि अगर हर समस्या का समाधान अखबार में अधिकारियों का बयान देने से ही दूर हो जाएगा तो सरकार अधिकारियों की बहाली ही क्यों करती है ? नगर आयुक्त ने अखबारों के माध्यम से हर- घर नल- जल योजना में मोटर हटा लेने के चेतावनी दे सिर्फ अपना पल्ला झाड लिया.जब तक घर -घर जाकर जांच नहीं की जाएगी तब तक अंदर मोहल्ले के लोगों को पानी नहीं मिलेगा.


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