Input your search keywords and press Enter.

नियोजित शिक्षकों के लिए शिक्षा-मंत्री ने लिया है बड़ा फैसला

Ashok-Chaudhary
Ashok-Chaudhary

फाइल फोटो



पटना.न्यूज़ डेस्क.
बिहार की नई सरकार में शिक्षा मंत्री बने अशोक चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. इस क्रम में आगामी मेट्रिक परीक्षाओं में दागी सेंटरों को शामिल नहीं करने का निर्णय लिया गया है.

Loading...

चौधरी ने कहा कि इस संबंध में फैसला हो चुका है. उनके अनुसार, ‘अब से पहले तक सेंटर लेने के लिए एक गिरोह काम करता था, इसलिए नकल रोकने के लिए पारदर्शिता अपनायी जायेगी.’ उनके निर्देशानुसार इस बार कम्यूटर से सेंटर तय किया जाएगा.

चौधरी ने अनट्रेंड नियोजित शिक्षकों के लिए भी बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि जो ट्रेड नहीं है सरकार उन्हें ट्रेनिंग देकर ट्रेंड करायेगी.
साथ ही ये भी कहा कि जो किसी कारण से ट्रेंड नहीं हो पायेंगे उन्हें शिक्षा विभाग में अन्य कामों में लगाया जायेगा.

इस न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.

[addtoany]
[related_posts_by_tax title=”रिलेटेड न्यूज़:”]

7 Comments

  • Anonymous says:

    Kgbv karmiyo ko bhi samida samapt kiya jaye

  • ajit kumar Mandal says:

    नितीश सरकार ने जो बिहार के अंदर युबाब्रग को पिछले 10 साल से जॉब दिया है बिहार के अंदर वो काफी सराहनीय है।।।।।जैसे की मुख्यरूप से शिकछक सबिंदा पर काम कर रहे थे लगभग 3 लाख उसे भी सरकार ने तोफा दिया है पिछले दिनों।।।।।।।हम सभी लोग भी आज सरकार की और से जो इम्पोर्टेन्ट योजना चलायी जा रहिए है उसे हम सभी सबिंदा पर काम कर रहे लगभग 3 लाख युबा पिछले 5 साल 4 साल 3 साल 2 साल 1 साल से लगातार काम करते आ रहे वो भी ज़िम्मेदारी के साथ हम सभी युबा भी नितीश सरकार से उपेक्छा रखते है की जल्द ही हमलोगों को भी तोफा दे।।।जैसे की कल अशोक चौधरी का रिपोर्ट आया है कल मुख्यरूप से सबिंदा वाले के लिए।।।आईटी सहायक।कार्यपालक सहायक।सेबिका।सहायिका।लेखापाल।सहायक अभियंता।आशा।और भी कई अन्य पद जो आज हम सबिंदा पे काम कर रहे है हम सभी भी ऐशा ही उम्मीद करते है नितीश सरकार से की हम सभी लोगों को भी भी बहुत ही जल्द तोफा दे।।।।।सबका साथ सबका बिकाश का ढोल पिट रहे मोदी सर देस में लेकिन काम सिर्फ और सिर्फ नितीश सरकार ही कर रहे है बिहार में पिछले 10 साल से अब तक लगातार।।।।।।।।।।।।।।।।।।।एक बात तो तय है की पिछले 10 साल में लगभग 8 लाख नोकरी तो नितीश सरकार ने दी है बिहार में चाहे सबिंदा की ही क्यों न हो।।।।।ये बिहार की युबा ब्रग की आवाज़ है।।।।।

  • Anonymous says:

    लौरे वाला न्यूज ह.ये सब से कुछ नही होगा.जय राजद जय बिहार.

  • shyam nandan singh says:

    नियोजित शिक्षक को अपने नियोजन इकाई से अलग स्थानानतरण पर जल्दी निर्णय ले क्योंकि महिला अपने ससुराल से दूर रहकर नौकरी कर रही है एवम उनका परिवारिक जीवन कष्टप्रद हो रहा है जो शिक्षक अपने जिला से दुर नौकरी कर रहे है उन्हें अपने परिवार से अलग रहकर काम करना पड़ रहा है जो शिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है

  • Anonymous says:

    नियोजित शिक्षक को अपने नियोजन इकाई से अलग स्थानानतरण पर जल्दी निर्णय ले क्योंकि महिला अपने ससुराल से दूर रहकर नौकरी कर रही है एवम उनका परिवारिक जीवन कष्टप्रद हो रहा है जो शिक्षक अपने जिला से दुर नौकरी कर रहे है उन्हें अपने परिवार से अलग रहकर काम करना पड़ रहा है जो शिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है

  • VIVEK YADAV says:

    आए दिन काफी बड़े पैमाने पर सड़क दुर्घटना में इजाफा हुआ है। इस दुर्घटना का एक मुख्य वजह अल्पवयष्क वाहन चालक और नौसिखिए वाहन चालक हैं। अधिकतर एेसे चालक को यातायात के साधारण संकेत चिन्ह के भी उदेश्य नहीं पता होते हैं। पूरी तरह से प्रशिक्षण नही प्राप्त होने के कारण एेसे वाहन चालक खुद एवं दूसरों की जिंदगी खतरे में डाल देते हैं । परिवहन विभाग अक्सर सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाती रहती हेै जिसमें वाहन के निबंधन , प्रदूषण , वाहन स्वामित्व प्रपत्र , चालक अनुगप्ति ( ड्राइवरी लायसंस) कागजात ,हेलमेट इत्यादि की बारीकी से जाँच परताल की जाती हेै ।इस धड़पकड़ से बचने के लिए बिना कागजात वाले अपने जिला मुख्यालय स्थित ; जिला परिवहन विभाग पहुंचते हेै और वहाँ शुरू होता हेै मुश्किलों का दौर ? ड्राइवरी लायसंस बनवाने के लिए फार्म भरना , रक्त समूह प्रमाणपत्र के साथ-साथ जिला परिवहन पदाधिकारी के समक्ष चालक को निर्देशानुषार वाहन चला कर दिखाना पड़ता हेै ।संतोषजनक एवं नियमपूर्वक वाहन चला लेने के उपरांत ही विभाग द्वारा सभी अन्य जरूरी बिंदुओ को जाँचने के बाद चालक अनुगप्ति प्रपत्र जारी करती है ।जारी किए गए लायसंस एक स्मार्ट कार्ड की भांति ” चीप ” युक्त होती हेै जो कि चालक प्रमाणपत्र जाँच करनेवाली मशीनी उपकरण में डालते ही चालक से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध हो जाती है ।लेकिन कुछ एेसे तबके हेै जिसको ये सब काफी अनावश्यक और बोझिल लगता हेै जिसके फलस्वरूप ये ” शार्टकर्ट ” का रास्ता अख्तियार करते है और शुरू हो जाता है – गैरकानूनी …अवैद्य …धोखाधड़ी का काम । विभाग द्वारा जारी असली कागजात को ये लोग कमप्युटर की मदद से फेरबदल कर अपने मनमाफिक तैयार करवा लेते है। कोशी क्षेत्र के साथ-साथ अन्य क्षेत्र जहाँ में परिवहन विभाग के पास जरूरी मशीनी उपकरण मुहैया नही होने के कारण कागजात की मशीनी जाँच नही हो पाती वहां बड़े पैमाने पर विभाग की आंखो में धूल झोंकने की काम किया जाता है । फर्जी कागजात को इतनी बारीक ढंग से तैयार किया जाता है कि अगर कागजात को सूक्ष्मता से जाँच नही किया जाए पता लगाना मुश्किल हेै कि कागजात असली है या नकली ।कोशी क्षेत्र यह चलन जोरों पर है ।एक सूत्र की मानें को उनका कहना है कि कोशी क्षेत्र , खासकर मधेपुरा जिला में मशीनी उपकरण से जाँच करने के बाद परिणाम ; विभाग के पांव तले की जमीन खिसका देगा ।सवाल यह भी है कि जब परिवहन विभाग तकनीक से जुड़कर व्यवस्था को उन्नत,सुलभ और बेहतर बनाना चाहता है तो आधा अधूरा क्यूँ ; पूरा क्यूँ नहीं ? विभाग को चाहिए मशीनी उपकरण मुहैया कर सघन जाँच शुरू करें ।

  • Sharafat hussain says:

    E m sar urdu tet ki bhali camp k jariye kijeye kyonki camp se bhali hogi to hmare jaise garib baccho ki bhe bhali ho jayegi Plz plz sar is par ek bar aur sochiye

Leave a Reply

Your email address will not be published.