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‘मर्डर और घोटालों में बेल और झूठी रिपोर्ट कराने पर जेल’

पटना पश्चिम से पंकज दुबे की रिपोर्ट. पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर छाया मुद्दा SC/ST एक्ट जो सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकि है उसको हिन्दुस्तान के सभी राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति से मिलकर व संसद में यह कानून को पारित कराने में लगे हुए हैं.

सोशल साइट के जरिए सवर्ण और ओबीसी वर्गों के लोग इस कानून को अपने लिए फाँसीवादी कानून बतला रहे हैं, इनका कहना है कि बिना जांच के गिरफ्तार करने का कानून तो पाकिस्तान में भी नहीं है. यह कैसा कानून जो मर्डर और घोटाले में बेल और झूठी रिपोर्ट कराने पर जेल.

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भारत बंद के दौरान सवर्ण और ओबीसी ने मिलकर पटना के बिहटा,मनेर, बिक्रम, नौबतपुर, पालीगंज और दुल्हिनबाजार के सभी मुख्य सड़कों का यातायात ठप्प कर दिया.सुबह से हीं बंद समर्थक सड़कों पर अलग अलग संघटनों के बैनर लिए बाजारों को बंद कराया और जगह जगह टायर जला कर, बंस-बल्ले लगा कर आवाजाही को रोक कर मोदी सरकार होश में आओ व तमाम राजनीतिक दलों के विरोध में मुर्दाबाद का नारा लगाया.

पटना के ग्रामीणों ने भी अपने अपने गांव के सड़को को जाम कर कानून के विरोध में कहीं काले झंडे दिखलाए तो कहीं सरकार विरोधी नारेबाजी कर अपना आक्रोश ज़ाहिर किया.पटना के इन शहरों में बजारों के शटर सुबह से रही बंद ,व्यापारियों और दुकानदारों ने भी इस बंदी का किया स्वागत.
भारत बंद में दानापुर रेल और आरा स्टेशन जाम के कारण बिहटा,नेउरा में भी कई ट्रेनें फंसी रही जिससे यात्रीयों को भारी परेशानी हुई. पटना पुलिस विधी-व्यवस्था को लेकर पहले से हीं पुलिस बल के साथ मुस्तैद दिखी कहीं भी किसी आमजनों को परेशानी न हो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के साथ डटी रही.

कुछ बुद्धिजीवीयों ने इसे काला कानून बताया कि सवर्णों ने बलिदान देकर आजादी दिलाई और आज तमाम राजनीतिक दलों ने मिलकर आरक्षण का वार करते हुए यह काला कानून भी बना डाला, देश से भगाने की साजिश रची जा रही है जो सवर्ण कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को इन राजनीतिक दलों को मानना पड़ेगा नहीं तो आने वाले समय देश में घरेलू हिंसा और एमरजेंसी को कोई रोक नहीं सकता.

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