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जीतन राम मांझी ने कहा- मैं किसी भी धर्म को नहीं मानता, मंदिर-मस्जिद पर दिया विवादित बयान

हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को गया के एक निजी विद्यालय में अपनी पार्टी का छठा स्थापना दिवस मनाया. इस दौरान पार्टी से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे.

इस मौके पर जीतन राम मांझी ने केक काटकर इस खुशी के पल का इजहार किया. इस दौरान जीतन राम मांझी ने कहा कि वह किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा कि ”जो कर्म करता है, वही पूजा है. महात्मा गांधी ने कहा था काम ही पूजा है. यह नहीं कि मंदिर में जाकर घंटी बजाएं या मस्जिद में जाकर अल्लाह को याद करें.

लगता है कि अल्लाह बहरा हो गए हैं. बाबा साहब आंबेडकर की राहों पर चलना चाहिए. मैं धर्म नहीं मानता.” इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि जब वह सीएम थे तो 34 निर्णय लिए गए थे जिसका अगर अनुपालन होता तो बिहार में सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक दृष्टिकोण से उत्थान होता लेकिन मौका नहीं मिला. कुछ का अनुपालन कराया गया.

कहा कि ‘हम’ के कार्यकर्ताओं व नेताओं की बात अधिकारी अनसुना कर रहे हैं. कॉमन स्कूलिंग सिस्टम को अभी तक लागू नहीं कर पाए हैं, अब लगता है इसके लिए सड़क पर उतरना होगा.

 

वहीं, जातीय जनगणना पर कहा कि वर्ष 2017 में जातीय जनगणना की मांग की गई थी. भारत सरकार के राज्य के मंत्री ने यह कहा है कि जातीय जनगणना सभी की होनी चाहिए. चाहे वह किसी वर्ग का हो. जातीय जनगणना होनी चाहिए लेकिन सभी जातियों की न कि सिर्फ एससी व एसटी की. सवर्ण जाति के गरीबों को भी आरक्षण मिला लेकिन भेदभाव किया गया है. पहले साढ़े 49 प्रतिशत आरक्षण था, अब संसोधन कर 60 प्रतिशत किया गया है. 9वीं सूची में भी शामिल किया गया था. एससी-एसटी के साथ अन्याय हो रहा है. अगर नहीं होगा तो घटक दल सड़कों पर उतरेगा. आरक्षण के नाम पर एससी-एसटी को अवरुद्ध किया गया है.