Input your search keywords and press Enter.

राज्य में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को देख मांझी की पार्टी ने सीएम सहित राज्यपाल को लिखा पत्र, की यह मांग..

हितेश कुमार : हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से0) के वरिष्ठ नेता व बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ० महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि मैं वर्षो से स्कूल, महाविद्यालयों में प्रयोगशालाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार एवं विभाग को पत्र लिखता आ रहा हूँ. आज भी महामहिम राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री जी को उच्च शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार के लिए पत्र लिखकर ध्यान आकृष्ट किया हूँ.

मुझे ख़ुशी है सरकार ने देर से ही सही मगर उच्च माध्यमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रयोगशाला उपकरणों की खरीद के लिय 2 अरब 40 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय के विभागों एवं कॉलेजों में वर्षो से बंद पड़े प्रयोगशालाओं के तरफ सरकार का अभी तक ध्यान न जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. समृद्ध प्रयोगशालाओं के न रहने से राज्य में शोध कार्य प्रायः ठप है. विश्वविद्यालय व अंगीभूत महाविद्यालयों के लगभग 10 हज़ार शिक्षकों के पद रिक्त हैं. राज्य के छात्र बिना शिक्षक के पढाई कर रहें है, बिना प्रयोगशालाओं में कदम रखे प्रायोगिक परीक्षा दे रहे है एवं
90% से अधिक अंक ला कर प्रायोगिक परीक्षा पास कर रहें हैं.

Loading...

इसी प्राप्तांक के आधार पर मेघा सूची तैयार की जा रही है और टॉपर भी इसी मेघा सूची के आधार पर हो रहें है. यह देश का सबसे बड़ा मेघा घोटाला वर्षो से राज्य में हो रहा है. डॉ० महाचंद्र प्रसाद ने कहा है राज्य में उच्च शिक्षा की दुर्दशा इसी से उजागर होती है कि वर्ष 2017 सत्र बी० आर० अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय के लिए 0 (जीरो) सत्र रहा अर्थात इस वर्ष यहाँ किसी भी स्तर की कोई परीक्षा नहीं ली गई जो दुर्भाग्यपूर्ण है. इस विश्वविद्यालय के 2 लाख छात्रों के साथ क्रूर खिलवाड़ किया गया. यह दूनियाँ का पहला उदाहरण है कि छात्र संघ चुनाव का बहाना बना कर किसी वि०वि० में पुरे साल कोई परीक्षा नहीं ली गई हो.


Widget not in any sidebars

डॉ महाचंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य के प्रायः अधिकतर विश्वविद्यालय का स्नातक सत्र 2-3 साल एवं स्नाकोतर सत्र 1-2 साल पीछे चल रहा है. जिससे राज्य के छात्रों का 2-3 साल अनावश्यक बर्बाद हो रहा है. छात्र नियमित सत्र में पढाई के लिए राज्य से बाहर पलायन को मजबूर हैं. विश्वविद्यालय आयोग के गठन में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसे भंग हुए आज लगभग 11 साल हो चुकी है. कई बार पहले भी इसके गठन की खबरें अखबारों में आ चुकी है, मगर आज तक इसका गठन नहीं हुआ. विश्वविद्यालय आयोग के गठन में सरकार के सामने कौन सी अड़चन आ रही है कि
ये मामला वर्षो के लंबित हैं. विश्वविद्यालय विभागों एवं इसके अंगीभूत कॉलेजों में वर्षों से शिक्षकों का काफी आभाव है जिससे राज्य में उच्य शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. उपर्युक्त तथ्यों के आधार कहा जा सकता है राज्य में सरकार की गुणवतापूर्ण शिक्षा की सोच बेईमानी है एवं सरकार लगातार वर्षो से राज्य के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते आ रही है. डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य में छात्रों के उज्जवल भविष्य को देखते हुए हमारे द्वारा जितनी भी बातें कहीं गई है उसे सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए इन अहम बिंदुओं पर गंभीर होने के साथ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.


Widget not in any sidebars

Leave a Reply

Your email address will not be published.