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शेखपुरा में कभी भी सोमे नदी में भूस्खलन से समा सकती है पानापुर का महादलित टोला


डीबीएन न्यूज़. नितीश कुमार. शेखपुरा नितीश कुमार. दर्जनों घर कभी भी भूस्खलन से समा सकता है सोमे नदी की गोद मे. दर्जनों लोगों के साथ कभी भी हो सकती है आपदा की यह भयावह घटनाएं पर आखिर कौन होगा इन घटनाओं के पीछे जिमेवार जहाँ प्रसाशन यह कहने पर आमादा है कि हमने तो इन लोगों के लिए जमीन उपलब्ध करा दी है पर लोग पुरानी जमीन को छोड़ कर जाने को तैयार नही है जबकि पीड़ित परिवार यह कहकर लोगों को शांत कर देता है कि उसके पास उतनी राशि नही है कि वह सरकार द्वारा दिये गए जमीन पर मकान बना कर रह सके .

शेखपुरा जिले का घाटकुसुम्भा प्रखंड का टापुओं में तब्दील पानापुर गावं में लगभग दर्जन भर घर व गली का पूरा पीसीसी ढलाई से लेकर नदी तक पांच
फिट से ज्यादा निचे जमीन को धस जाने से ग्रामीणो में दहसत का माहोल व्याप्त है जिसके कारण पूरी रात रत जगा कर ग्रामीण दहसत में जी रहे है.

पानापुर के दर्जनो ग्रामीणो ने बताया की पानापुर के हरूहर नदी में आकर गिरने वाली सोमे नदी के किनारे बसा पानापुर का महादलित टोला में पीसीसी गली के साथ साथ पक्का मकान करीब 5 फिट नीचे धस जाने के कारण लोगों में अक्सर भय बना रहता है. महादलित टोले के दसरथ मोची ,दुखी मोची ,बिनोद मोची ,भोला मोची , चांदो मोची ,ब्रह्मदेव मोची ,विशुनि मोची ,राजो ,अमीरक ,मनोज ,लोरिक राम सहित कई ग्रामीणो के घर एवं घर के आगे की जमीन कमर भर निचे धस जाने से लोग दहसत में रह रहे है.

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ग्रामीणो ने बताया की जमींन धसने से लोग सहमे हुए है इन महादलित टोले में सभी मकान पक्का का इन्दिरा आवास से बना हुआ है और सभी मकानों में भूस्खलन के कारण मोटी मोटी दरारें भी आ गयी है इतना ही नही छत भी दीवाल को छोड़ चुका है इसके बावजूद लोग इसी जर्जर मकान के भीतर रह रहे है. सोमे नदी का पानी भी भूस्खलन में धसी गली में आ चुका है.

यह नदी इतनी गहरी है कि अक्सर देखा गया है कि जब जब नदी में पाने का जलस्तर कमने लगता है तब तब भूस्खलन होकर गली व मकान के नीचे की जमीन नदी की ओर धसने लगती है जिससे लोगों में और दहशत बढ़ जाती है. पीड़ित परिवार बताता है कि हम लोगों को तीन तीन डिसमिल जमीन तो उपलब्ध करा दी गयी है. पर हमारे पास उतने रुपये नही है कि हम उस जमीन पर मकान बना कर रह सकें.

इस वावत अंचलाधिकारी रमेश कुमार बताते है कि उन पीड़ित परिवारों के लिए तो बहुत पहले ही भूस्खलन से भी पहले तीन तीन डिसमिल दिया जा चुका है और कई बार पुराने जर्जर मकान को खाली करने का निर्देश भी दिया जा चुका है पर ये लोग मकान को छोड़ने को तैयार नही है. जबकि इन मकानों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि ये सारा मकान कभी भी भूस्खलन से नदी की गोद मे समा सकता है. इन परिवारों को एक एक बार इंदिरा आवास का लाभ दिया जा चुका है. इसलिए सरकार के नियमानुसार दुवारा इन्दिरा आवास का लाभ नही दिया जा सकता है.

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