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मोतिहारी का महात्मा गांधी केविवि अनिश्चितकाल के लिए बंद, प्रोफेसर के फेसबुक पोस्ट के मामले ने तुल पकड़ा


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महात्मा गांधी केविवि मोतिहारी

डीबीएन न्यूज/मोतिहारी {मधुरेश}

” जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गयी…” आखिरकार बापू की कर्मभूमि चंपारण के मोतिहारी में स्थापित महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय राजनीति का शिकार हो ही गया. मामला इतना गंभीर हो गया है कि कुलपति ने विश्वविद्यालय को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है. हालात इतने बिगड़ गये हैं कि आए दिन यहां धरना-प्रदर्शन, बात-विवाद और मारपीट आम बात जैसी हो गयी है. यहां कभी छात्र आक्रोशित होते हैं तो कभी शिक्षकों का कुलपति से संघर्ष होता है. ताजा मामला विश्वविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर संजय कुमार से जुड़ा है. प्रो. संजय कुमार ने देश के पूर्व पीएम भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर सोशल मिडिया में कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया था. प्रोफेसर के पोस्ट से आहत कुछेक लोगों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी थी. इस प्रकरण के बाद से विश्वविद्यालय से लेकर पूरे मोतिहारी की राजनीति में उबाल आ गया है. ऐसा अनुमान है कि शांति भंग की आशंका के मद्देनजर 20 अगस्त से केन्द्रीय विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अरविंद अग्रवाल ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय अघिनियम 2009 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए आज इस आशय की घोषणा कर दी. माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय में शांति बहाली को ध्यान में रख कर कुलपति ऐसा निर्णय लिया है.

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दो दिन पहले हुए इस प्रकरण को लेकर प्रो.संजय कुमार ने मोतिहारी नगर थाने में मामला दर्ज कराया है. प्राथमिकी दर्ज होते ही पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है. उधर विश्वविद्यालय के एक पदाधिकारी ने भी पुलिस को आवेदन देकर प्रो. संजय कुमार पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले प्रो.संजय कुमार के समर्थन में विपक्षी दल के नेताओं ने कमर कस लिया है. वहीं सरकार के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने इस मामले में जिला प्रशासन पर सवालिया निशान लगाया है. उनका कहना है कि आरोपियों के साथ पुलिस अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है, जबकि भड़काऊ पोस्ट लिखने वाले प्रो.संजय कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. चूंकि अब यह मामला राजनीतिक रंग में रंग गया है इसलिए इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल भी प्रभावित हो सकता है. केविवि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है ताकि स्थिति सामान्य हो सके और विश्वविद्यालय में पुनः शैक्षणिक माहौल बनाया जा सके.

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