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देश को ऑक्सीजन, रेमडेसिविर के लिए युद्ध का मैदान बना देगा मोदी सरकार- सचिन पायलट

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर को राष्ट्रीय चिकित्सीय आपातकाल के तौर पर देखने की जरूरत पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि केंद्र को आगे आना चाहिए और स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी सिर्फ राज्यों पर नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि भारत को ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और रेमडेसिविर के लिए ‘युद्ध का मैदान बनने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों से मिलने वाली जानकारी इस महामारी से निपटने में मददगार होगी तथा उसे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए सकारात्मक भावना से लेना चाहिए।

पायलट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन और वेंटिलेटर की व्यवस्था करने को लेकर फार्मूला और मानदंड तैयार करने चाहिए था तथा पारदर्शी ढंग से संसाधनों का वितरण करना चाहिए था। राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा, ”ऑक्सीजन के लिए मांग और आवंटन को लेकर विभिन्न तरह की जानकारी सामने आ रही है।

भारत सरकार को तीन-चार मानदंड बनाने चाहिए थे। मसलन, राज्यों में कोरोना के मामले कितने हैं, संक्रमण की दर क्या है, मृत्यु दर क्या है, अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या कितनी है और हम कैसे ऑक्सीजन का वितरण करेंगे।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ”ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले राज्यों को शायद इसकी जरूरत उतनी नहीं हो, जो उन राज्यों को हो जहां उत्पादन नहीं हो रहा है।

कुछ मामलों में ऐसा हो रहा है कि राज्य सीमाओं को बंद करना चाहते हैं क्योंकि वे ऑक्सीजन कंटेनरों के वहां से गुजरने में सहूलियत देने का विरोध कर रहे हैं। संघीय ढांचे में ऐसी बातें नहीं होने दिया जाना चाहिए।” पायलट ने ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और रेमडेसिविर के आवंटन एवं वितरण के लिए पारदर्शी मानदंड और आधार तय करने की पैरवी की।