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आमलोगों में सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज़ से प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की घटती लोकप्रियता कॊ बचाने की ज़रूरत : कृष्णा त्रिवेदी

डीबीएन न्यूज/गया(प्रिंस)- बदलते आधुनिक परिवेश में सोशल मीडिया इतना हावी हो गया है कि प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता आम लोगों में घटता जा रहा है जिसे संरक्षण की आवश्यकता है .

उक्त बातें पहेर विश्वविद्यालय की शोध कर रही छात्रा कृष्णा त्रिवेदी ने सन्मार्पेग कॊ एक विशेष मुलाकात के दौरान कही.मास कम्युनिकेशन में बतौर शिक्षिका कृष्णा त्रिवेदी ने बताया कि आज के बदलते परिवेश में सोशल मीडिया की अपेक्षा प्रिंट मिडिया का क्रेज आमलोगों में( चाहे वे युवा हों या बुजुर्ग) घटता से जा रहा है. जिसे लेकर प्रिंट मीडिया को अपना अस्तित्व बचना एक चुनौती बनता जा रहा है. आज से एक दशक पूर्व जब घर में अखबार आता था तब घर के सभी लोग बारी-बारी से आसपास की खबरें दिलचस्पी से पढ़ते थे ,लेकिन आज इसकी जगह मोबाइल ,सोशल
साईट एवं इंटरनेट ने इतनी तेजी से जगह बना रही है कि अखबार का अस्तित्व खतरे है.


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आज अखबार कॊ पढ़ने में थोड़ा समय भी लोग नहीँ दे पा रहे हैं ,जबकि इंटरनेट सोशल साईट ,मोबाईल पर लोग घंटों अपना कीमती समय गंवा रहे हैं. इसी प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता कॊ सोशल साइट से जोड़ने एवं नये ऐप कॊ जोड़ने के लिये कृष्णा त्रिवेदी ने शोध शुरू किया है ताकि प्रिंट मीडिया का क्रेज़ हमेशा बरकरार रहे.इसके साथ ही प्रिंट मीडिया में कार्यरत पत्रकार बंधुओं के कैरियर और उनके कार्यकुशलता को बचाने सहित सोशल साइट में एक नए एप्प के साथ मिलकर कार्य करने व प्रिंट मीडिया को और अधिक सशक्त बनाने को ले कर कृष्णा जी अपना अनुशंधान कर रही है.

कृष्णा ने कई शोध पत्र प्रकाशित की है, लेकिन उनकी प्रबल इच्छा है कि वे बदलते परिवेश में युवाओ को भी एप्प के साथ-साथ प्रिंट मीडिया का महत्व और उसकी उपयोगिता के बारे विशेष में जानकारी मिल सके और आने वाले समय मे भारत में फिर से लोगो को प्रिंट मीडिया का इंतजार हो.हर सुबह लोग चाय के साथ अपने नये पुराने साथी के साथ अखबार कॊ हाथ मे लेकर पढ़े.

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इसके साथ ही इस क्षेत्र में कार्यरत पत्रकार भाइयों को भी एक मजबूत और इज्जत इस समाज में दोबारा से मिल सके और पत्रकारिता के साथ-साथ आज पत्रकार भाइयों को इन सोसल साइटों का भी अध्ययन करके इनमे से भी अपने लिए कुछ उपयोगी बातें ढूंढे. आज भारत मे एक चिंता का विषय है कि सोशल साइट के कारण हमारे पुराने साथी अखबार या पत्रिका का साथ हमसे दूर होता जा रहा है.इन्हीं सब बातों से कभी-कभी ऐसा लगता है कि कहीँ प्रिंट मीडिया सिर्फ कहानियों तक ही सीमित हो कर रह न जाए.

इस लिए कृष्णा जी ने आज के अखबार या पत्रिका में कुछ नये तकनीकी और नए आउटलुक का इस्तेमाल और गरीब ,अमीर, शहर, देहात, को अपना करके लोगो को इस तरफ आकर्षण करने के लिए अपना अनुशंधान कर रही हैं .

ये देश के विभिन्न प्रदेशों के नामी गिरामी पत्रकारों एवं संपादको से मिलेगी और उनका अनुभव शेयर करेगी की आज के समय में पाठक क्या चाहते हैं ? कैसे प्रिंट मीडिया सब पर भारी पड़ेगी ?

इंदौर से मीडिया मास कम्युनिकेशन में परास्नातक होने के बाद इन्होंने कई प्रिंट मीडिया में काम किया और गुजरात के मुदरा इंस्टीट्यूट ऑफ मास कॉम्युनिकेशन में कार्य किया ,लेकिन अभी वर्तमान में वे एक प्राइवेट कॉलेज में मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी है. बतौर शोधार्थी कृष्णा की इच्छा है कि एक बार फिर से हर -घर हर- परिवार का एक ही मकसद हो आज का अखबार और इस क्षेत्र में कार्यरत हर पत्रकार का सपना और उसकी मेहनत पूरी हो.

इसी क्रम में वे देश के विभिन्न राज्यों का भ्रमण कर सम्पादक ,क्षेत्रीय संवाददाता और पाठकों से मिलकर अपना एवं उनका अनुभव शेयर कर जैसे भी कुछ छूट या कमी रह गयी है तो उसे खुद और अपने साथियों के साथ मिलकर दूर करने की कोशिश करेगी.

कृष्णा त्रिवेदी ने यह शोध अपने साथियों और प्रिंट मीडिया का अस्तित्व को बचाने और उसे दोबारा से समाज में वही प्रतिष्ठा दिलाना इनके शोध का मुख्य उद्देश्य है.


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