नीतीश कुमार को ‘पलटू राम’ कहने वाले तेजस्वी को प्रशांत किशोर ने दिया जवाब

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tejashwi prashant

नीतीश कुमार को पलटू राम का टैग तेजस्वी यादव ने महागठबंधन से अलग होने के बाद दिया था. अबतक किसी जदयू नेता ने इस तरह से पलटू राम का जवाब नहीं दिया था इसलिए आज भी विरोधीयों को अगर नीतीश पर हमला करना होता है तो पलटू राम ही बोलते है. लेकिन आज प्रशांत किशोर ने बताया लोग को जब लगता है कि कोई चीज़ उनके पक्ष में नहीं है तो उन्हें पलटू राम कह दे.

अगर पलटू राम कहना है तो सभी पार्टी के नेताओं को बोलो, भारत में कौन ऐसी पपार्टी है जो दो तीन बार पल्टी नहीं मारी हैं, चाहे मायावती हो, या ममता या कांग्रेस. सभी पार्टियाँ और गठबंधन समय अनुसार बनाते है. प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार ने एक बार पार्टी बदला है तो उन्हें पलटू राम कहा जाता है और बाकियों ने तो चार पांच बार बदला हैं इस लिहाज से तो नीतीश कुमार को सीधा राम कहना चाहिए…विडियो देखें:

बता दें कि देश के प्रमुख सियासी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) आरसीपी सिंह को पीछे छोड़ते हुए जदयू में न.2 का पद हासिल कर लिया है. पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को उपाध्यक्ष बनाकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी में उनकी हैसियत नंबर दो की होगी. प्रशांत किशोर दो दिन पहले पटना में हुए छात्र संगम में नीतीश के साथ थे.

अब सवालों का दौर भी शुरू हो गया है कि क्या नीतीश कुमार आरसीपी सिंह से न.2 का हैसियत छीन लेंगे. क्या प्रशांत किशोर ही जदयू के भविष्य के नेता होंगे?

फिलहाल प्रशांत किशोर पार्टी की रणनीती और पार्टी को मजबूत करने में जुटे है. बता दें कि प्रशांत किशोर 16 सितंबर को पटना में जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी में भी शामिल हुए थे.

मोदी के चुनावी कैम्पेन संभालने वाले प्रशांत किशोर बहुत बड़े पोलिटिकल एनालिस्ट हैं और उन्हें जनता के मुड समझने में ज्यादा समय नहीं लगता है. हालांकि 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी की तरफ से मैदान में उतरे थे. लेकिन मोदी और नीतीश जैसे दिग्गजों को सत्ता की सीढ़ियां चढ़ाने वाले इस मैनेजमेंट गुरु को यूपी से निराशा ही हाथ लगी थी.

टीम मोदी से नाता टूटने के बाद पीके ने 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश का साथ दिया. बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है.. झांसे में न आएंगे.. नीतीशे को जिताएंगे, जैसे स्लोगन देकर उन्होंने महागठबंधन के पक्ष में हवा बनाने में मदद की थी.

रिपोर्ट के अनुसार पटना में मई में हुई एक बैठक में नीतीश ने पीके को पार्टी ज्वाइन करने की सलाह दी थी. दोनों की घनिष्टता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीके पटना में सीएम आवास में ही रहते थे. नीतीश के करीबी कुछ नेता बताते हैं कि प्रशांत किशोर के कुछ सामान उनके पार्टी ज्वाइन करने से पहले तक सीएम आवास में ही थे, क्योंकि वो कभी-कभी मिलने आया करते थे.

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