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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर शहरी नक्सल का आरोप लगाकर गिरफ्तार किए जाने के खिलाफ अरवल में मार्च

{के कुमार “श्रवण”}सुधा भारद्वाज, वरनोन गोंजाल्विस, वरवरा राव, गौतम नवलखा एवं आनंद तेलतुंबडे की साजिशकर्ता के आरोप में गिरफ्तार किए जाने, उन्हें शहरी नक्सल होने का ठप्पा लगा कर देश विरोधी करार दिये जाने के खिलाफ अरवल में आम नागरिकों का मार्च निकाला गया.नागरिक मार्च भगत सिंह चौक से प्रखंड मुख्यालय तक निकला उसके बाद पुनः भगत सिंह चौक पर पहुंचकर एक सभा की गई.

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वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार अपना प्रभाव खो रही हैं. जनता में उनका प्रभाव घट रही है. आने वाले समय में अपनी हार दिख रहे हैं. लिहाजा, जनता में पनप रहा आक्रोश के लिए वैसे बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, वकीलों, साहित्यकारों को जिम्मेवार ठहराने में लगे हैं, जो मोदी सरकार के क्रियाकलाप के खिलाफ हैं. जो हमेशा गरीबों- दलितों के पक्ष में खड़े रहे हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता व गरीबों के सहयोगी सुधा भारद्वाज एवं आनंद तेलतुंबडे जो अंबेडकर के वंशज हैं और जाने-माने दलित बुद्धिजीवी हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले प्रसिद्ध पत्रकार गौतम नवलखा को निशाना बनाना फासीवाद की आहट स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है. मार्च के जरिये बिना शर्त रिहा करने की मांग की गई.

इस मार्च में रेड क्रॉस के जिला सचिव राज नारायण चौधरी, वकील अख्तर शीरानी, अवकाश प्राप्त शिक्षक वसंत कुमार सिन्हा, डॉ शैलेश कुमार सिन्हा, वॉर्ड पार्षद टून्ना शर्मा, पैक्स अध्यक्ष जय गोपाल सिंह, मुखिया विजय पासवान तथा माले नेता एवं जिला सचिव महानंद, रविंद्र यादव, गणेश यादव, राम कुमार सिन्हा, दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता समेत भारी संख्या में नागरिक शामिल थे.

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