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आरटीआई ऐक्टिविस्ट धैर्यकांत को दरभंगा से मिल सकता है टिकट

दरभंगा. निशांत झा. धैर्यकांत मिश्र का नाम दरभंगा कि सक्रिय राजनीति में बड़े सम्मान से लिया जाता है, कारण उनकी साफ़ सुथरी छवि, उनका निष्पक्ष रवैया और उनका अन्दाज़. सोशल साइट्स पे अपने लेखों से कई बार इन्होंने दरभंगा से लेकर बिहार के नेताओं कि पोल पट्टी खोली है वो भी अपने द्वारा आरटीआई के माध्यम से जुटाये गए तथ्यों के आधार पर चाहे मामला दरभंगा एर्पॉर्ट का हो, नगर के पोखरो के सौंदर्यकरन का हो या डीएमसीएच में सालों से लम्बित कैन्सर सेण्टर का, धैर्यकांत ने हर समय इन मामलों को लेकर हो रही राजनीति को अपने आरटीआई के माध्यम से जनता के सामने रखा है.


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दैनिक जागरण ने वर्ष 2016 में धैर्यकांत को “सूचना का सिपाही “कह के उनके सम्मान में एक विशेष लेख लिखा था जो बहुत से राजनेताओं को खटक गया था, ख़ैर धैर्यकांत के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी और वो अपना काम पूरी ईमानदारी से करते रहे. धैर्यकांत पूर्व में मिथिला स्टूडेंट यूनियन में राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पे अपनी सेवा दे चुके है और इसके अलावा कई एनजीओ को आज भी अपनी सेवाएँ दे रहे है.

धैर्यकांत का नाम तब सुर्ख़ियो में आया जब उन्होंने सीबीएसई पर दवाब बना कर उनसे आधिकारिक तौर पे मैथिली को CBSE में शामिल करवाने के लिए प्रपोज़ल माँगने के लिए बाध्य कर दिया, वो बात अलग है कि राजनीतिक अकर्मण्यता कि वजह से धैर्यकांत के इस प्रयास को भी सस्ते बस्ते में डाल दिया गया.

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धैर्यकांत फ़ैशन जगत से आते है और एक अन्तर्राष्ट्रीय फ़ैशन पोर्टल के लिए लिखते है और क़ई बहुराष्ट्रीय फ़ैशन ब्रांड्ज़ को अपनी कनसलटेंसी प्रदान करते है. सूत्रों कि माने तो धैर्यकांत पिछले छः महीनो से भारत में ही है और बहुत शीघ्र दरभंगा भी आ सकते है. पिछले कुछ महीनो में उनकी नज़दीकी जिस तरह से दरभंगा सांसद से बढ़ी है , वो किसी और समीकरण के बनने कि तरफ़ इशारा कर रही है.

उड़ती उड़ती ख़बर आयी है कि बहुत सी पार्टियाँ धैर्यकांत के संपर्क में है जिसने राजद का भी नाम आ रहा है और सब कुछ सही रहा तो २०२० का चुनाव इस बार बहुत रोमांचक हो सकता है. क़रीबियों कि माने तो धैर्यकांत कि लोकप्रियता को भुनाने में कोई भी पार्टी पीछे नहीं रहेगी लेकिन ये तय धैर्यकांत को करना है कि वो कैसे चुनाव लड़ते है .

मैथिली पत्रकार निशान्त झा से बात करते हुए धैर्यकांत ने कहा है कि वो दरभंगा का पोटेंसीयल जानते है और पिछले बीस साल में जिस तरह से इसको लूटा गया है , वो हर एक पाई पाई का हिसाब लेंगे. उन्होंने कहा है कि वो अभी अपने करीयर के सबसे बेहतरीन दौर में है लेकिन फिर भी वो ये सब छोड़ कर दरभंगा कि सेवा करना चाहते है. अगर धैर्यकांत सच में अगला चुनाव लड़ते है तो दरभंगा के चुनाव में पहली बार यहाँकि जनता को एक तीसरा विकल्प मिलेगा जो युवा भी है और कर्मठ भी.


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