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तेजस्वी यादव को लेकर शिवानंद तिवारी ने दिया बड़ा बयान,जानें क्या

बिहार में लालू यादव की पार्टी राष्‍ट्रीय जनता दल में सियासी हचचल जोरों पर है. पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें जोरों पर है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राजद का कमान सौंपने की चर्चा के बीच वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी का एक बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने आरजेडी में बदलाव और पार्टी की कमान तेजस्वी को सौंपने की चर्चा को मीडिया का शिगूफा बताया है. शिवानंद तिवारी ने तो यहां तक कह दिया कि पार्टी में क्यों बदलाव होगा? तेजस्वी तो हमारे पहले से ही नेता हैं. उनके नेतृत्व में ही विधानसभा का चुनाव लड़ा गया.

शिवानंद तिवारी का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कहीं कोई कमी तो नहीं दिखी. राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि अगर तेजस्वी यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे तो उससे क्या होगा? राजद को संभालना कोई पहाड़ का काम तो है नहीं. लेकिन अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि आज भी तेजस्वी यादव ही नेता हैं. लेकिन वे कभी नहीं चाहेंगे कि उनके पिता जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं उनसे यह पद ले लें. इसकी कोई जरूरत नहीं है और तेजस्वी ऐसा नहीं चाहेंगे.

शिवानंद तिवारी ने की लालू यादव की तारीफ

शिवानंद तिवारी ने कहा कि पार्टी की स्थापना दिवस पर सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का जबरदस्त भाषण हुआ. मैंने सोचा नहीं था कि तबीयत खराब होने के बावजूद वे इतना शानदार भाषण दे सकेंगे. लेकिन उन्होंने पूरी तरीके से पॉलिटिकल भाषण दिया. हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पास जो तजुर्बा और अनुभव है वह स्कूल कॉलेज में नहीं पढ़ाया जाता. उनके अनुभव का लाभ बेटे तेजस्वी को मिल रहा है. शिवानंद तिवारी ने कहा कि यह मीडिया का ख्याली पुलाव है कि तेजस्वी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन रहे हैं. अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है.

कार्यकारी अध्यक्ष बन सकते हैं तेजस्वी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तेजस्वी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सीधे कुर्सी पर बैठाने की जगह यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. पहले तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है. उसके बाद 2022 में राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान दी जाएगी. तैयारी इस बात की है कि कोरोना की स्थिति थोड़ी बेहतर हो तो लालू प्रसाद यादव पटना पहुचेंगे और यही घोषणा होगी. माना जा रहा है कि लालू ने जगदानंद सिंह का इस्तीफा इसलिए टाला क्योंकि वे चाहते हैं कि तेजस्वी को जगदानंद सिंह का पूरा साथ मिले.