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निगरानी टीम ने सदर एसडीओ आवास पर की छापेमारी, 10 हजार रुपये रिश्वत लेते स्टेनो को पकड़ा

डीबीएन न्यूज/मोतिहारी {मधुरेश}

निगरानी विभाग की टीम ने आज पूर्वी चंपारण के जिला मुख्यालय मोतिहारी में बड़ी कार्रवाई की है. निगरानी टीम ने यहां के सदर एसडीओ आवास पर गोपनीय शाखा में कार्यरत डाटा इंट्री आॅपरेटर सह स्टेनो पुरुषोत्तम​ प्रसाद को दस हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद टीम उसे अपने साथ लेकर चली गई. सबकुछ इतना जल्दी हुआ की किसी को कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला.

इस संदर्भ में निगरानी विभाग के डीएसपी विमलेन्दु कुमार वर्मा ने बताया कि जब्त रुपयों में पांच-पांच सौ के नोट शामिल हैं. मिली जानकारी के अनुसार पिड़ारी निवासी राजू प्रसाद ने निगरानी विभाग में शिकायत की थी कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक के साथ मिलकर शराब कारोबारी अनिल गुप्ता व सुनील गुप्ता ने दहवा में राजू प्रसाद के नाम पर अवैध ढंग से से शराब दुकान का बंदोबस्ती करा लिया था.

वर्ष 2014 में 23 दिसम्बर तक दुकान का संचालन हुआ. इस दौरान चार माह का टैक्स बकाया रह गया था. इस संदर्भ में राजू प्रसाद ने मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों को आवेदन देकर इस मामले की शिकायत की थी. इस मामले में डीएम ने एसडीएम को जांच करने का आदेश दिया था.

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जांच रिपोर्ट की प्रति देने के लिए डाटा इंट्री आॅपरेटर सह स्टेनो रिश्वत की मांग करने लगे. इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की गयी थी. इसी शिकायत के आलोक में आज निगरानी विभाग के डीएसपी विमलेन्दु कुमार वर्मा के नेतृत्व में इंसपेक्टर श्यामबाबू प्रसाद, आसिफ एकबाल मेहंदी एवं विजय चौधरी सहित टीम के अन्य सदस्यों ने छापेमारी कर स्टेनो पुरुषोत्तम प्रसाद यादव को गिरफ्तार कर लिया.

निगरानी डीएसपी के मुताबिक एसडीओ के कार्यालय में यह कार्य किस कारण से लंबित था, इसकी भी जांच की जाएगी. इधर इस मामले के सूचक राजू प्रसाद ने बताया कि एसडीएम कार्यालय में उसके काम में जानबूझ कर विलंब किया जा रहा था. स्टेनो ने उससे कहा था कि हाकिम से बात हो गयी है अगर पैसा नहीं दोगे तो यहां से तुम्हारे काम लायक रिपोर्ट नहीं जाएगी.

यहां बता दें कि गिरफ्तार पुरुषोत्तम प्रसाद यादव मूल रूप से पश्चिमी चंपारण के चौतरवा थाना क्षेत्र के सिरौना टोला का निवासी है. वह संविदा पर वर्ष 2010 से यहां कार्यरत है.हालांकि जिले में निगरानी की यह पहली कार्रवाई नहीं है, फिर भी यहां रिश्वतखोरी रुकने का नाम नहीं ले रही है.


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