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मुख्यमंत्री नीतीश का गांव को बारहमासी पक्की सड़क से जोड़ने का दावा खोखला, दर्जनों गांव 25 वर्षो से तरस रहा है पक्की सड़कों के लिए

डीबीएन न्यूज़/शेखपुरा(नीतीश कुमार)- बिहार के शेखपुरा जिले के घाटकुसुम्भा प्रखंड के दर्जनों गांव आज भी पक्की सड़कों के लिए वर्षों से तरस रहा है.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बातें की हर गांव की सड़कें पक्की करण कर उसे मुख्य सम्पर्क पथ से जोड़ दिये जाने की वायदे हवा हवाई प्रतीत होती है.


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उक्त प्रखंड की ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई फरिस्ता बनकर आएगा जो सालो -साल मेरे बीवी बच्चों को नदियों में डूबने से बचाएगा.इन बातों में शेखपुरा जिला के घाटकुसुम्भा प्रखंड में पड़ने वाले पानापुर पंचायत के सैकड़ो ग्रामीणों की दर्द है.शायद पानापुर गांव के इन ग्रामीणों के आँखे ऐसे कई सावन देख चुके है.जब प्रखंड के दर्जनों गांव में जलजमाव से उनके बीवी व बच्चे की मौत सड़क के अभाव में नदियों में डूबने या नाव हादसों में हो चुकी है.पर आज तक इन लोगों की सुनने और उनकी समस्याओं को दूर करने का अब तक कोई भी मुनासिब कदम नही उठाया जा सका है.

पुरानी कहावत है कि दसा दस साल में बदलती है पर शायद पानापुर के लिए यह कहावत भी झूठी साबित हो रही है .घाटकुसुम्बा प्रखंड में पड़ने वाली नदी के टापुओं में तब्दील पानापुर पंचायत के ग्रामीण आज भी अपने आप को विकास से कोसो दूर हैं. यहाँ विकास के नाम पर आज तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से ग्रामीण अछूता है.सरकार प्रत्येक टोले तक पक्की सड़क पहुंचाने की वादा व दावा कर रही है पर वह वादे भी शायद पानापुर के लोगों के लिए शिर्फ़ लॉलीपॉप बन कर रह गयी है.हरुहर, सोमे मौना जैसे नदियों के गोद में बसा यह पंचायत घाटकुसुम्भा प्रखंड में जुड़ने के बाद भी 25 सालों से आज तक जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों की घुट्टी पी -पी कर जीने को मजबूर है.

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इस पंचायत के आलापुर,पानापुर,प्राणपुर,जितपारपुर एवं हरनामचक गावं है जो बरसात में टापुओं में तब्दील हो जाता है. यहां सिर्फ चुनाव के मौसम में ही कोई नेता के चरण पड़ते है और इस चुनावी बयार में ग्रामीणो को विकास के लिए आश्वासनो की झरी लगा देते है.1993 में ही तत्कालीन मुख्य्मन्त्री लालू यादव ने घाटकुसुम्बा ब्लॉक की नीब रखा था जिसमे पानापुर पंचायत को लखीसराय जिला से काटकर इस ब्लॉक में शामिल किया गया था तब से अब तक यहां सड़क के नाम पर सिर्फ पगडंडियाँ ही रह गयी है .

इतना ही नहीं नीतीश कुमार को पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर इस पंचायत में 2007 में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत कोयला से आलापुर तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया पर संवेदक द्वारा रातों -रात जबरन सड़क में आ रहे घरों को ढाह दिए जाने के कारण पानापुर के ग्रामीण और संवेदक में हुए विवाद के कारण जो सड़क निर्माण कार्य रुका आज तक रुक ही रह गया पुनः शुरु नहीं किया गया.आलम यह है कि पानापुर के लोगों के साथ जिला के अधिकारियों को भी घाटकुसुम्भा जाने के लिए कई बार सोचने को मजबूर होना पड़ता है.गांव में मौजूद स्कूलों के विद्यार्थियों को भी स्कूल आने -जाने के लिए कच्ची सड़कों का ही सहारा है.

इतना ही नही कई बार इन क्षेत्रों में नदी पार करने के दौरान राहगीरों को डूबने या नाव हादसा होने के कारण लोगों की जान जा चुकी है पर इसके बावजूद भी अब तक प्रसाशनिक अधिकारियों की नींद सड़क निर्माण के लिए नही खुल सकी है.


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