महिला जनप्रतिनिधियों की खुद की लाज या पति-पुत्र का दबाव, आखिर खुद क्यों नहीं ले रही बैठक में भाग।

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बेन की महिला जन प्रतिनिधि आज भी घूंघट में।

पति या पुत्र के दबाव में जी रही बेन की महिला जन प्रतिनिधि।

डीबीएन न्यूज़ /नालन्दा(डीएसपी सिंह):–नालन्दा जिला के बेन थाना परिसर में छठ व्रत को लेकर शांति समिति की बैठक की गई इसमें प्रखंड के मुखिया, पंचायत समिति,वार्ड सदस्य, पंच,सरपंच एवं अन्य बुद्धिजीवियों को निमंत्रित किया गया था। देखा गया कि महिला पंचायत प्रतिनिधियों के जगह पर उनके पति या पुत्र बैठक में शामिल हुए। आखिर क्या कारण है कि महिला प्रतिनिधि बैठक में भाग नहीं ले रही हैं।क्या वो घूंघट में ही नहीं रहना चाहिए हैं या पति-पुत्र के दबाव में हैं? सरकार महिलाओं के विकास के लिए सदा प्रयत्नशील रही है। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने उनके लिए सीटें आरक्षित की थी।वे किसी तरह स्वेच्छा या पति-पुत्र के दबाव में चुनाव में भाग भी ली और जीत भी। पर जब क्षेत्र में भ्रमण करने या बैठक में भाग लेने की बात आती है तो वह घुंघट में ही दुबकी रहती हैं ।इसका ताजा उदाहरण शुक्रवार को बेन थाना परिसर में छठ व्रत को लेकर हुई शांति समिति के बैठक में महिला जनप्रतिनिधि के जगह पर उनके पति या पुत्र की उपस्थित होना है।

इस पर थानाध्यक्ष राम बदन सिंह भी अपना कुछ विचार नहीं दे सके।जिन जिन प्रतिनिधियों को वो निमंत्रण दिए थे जब वो सब लोग नहीं आए तो यह कौन बैठक हुई।इसे तो मात्र बैठक की खानापूर्ति ही कहा जा सकता है।इस तरह से देखा जाए तो बेन प्रखंड की महिला जनप्रतिनिधि आज भी पति या पुत्र के दबाव में काम कर रहे हैं।उनकी स्वयं की कोई पहल है ही नहीं।ऐसे में सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान योजना का क्या फायदा। सरकार जिसे ऊपर उठाना चाहती है जब वही ऊपर उठने को तैयार नहीं तो इसमें सरकार क्या करे।

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