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चंपारण की धरती पर भी हुआ शहाबुद्दीन का स्वागत

sahabuddin

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पटना.मधुरेश.​ केन्द्रीय कारा भागलपुर से रिहा होकर अपने काफिले के साथ सिवान जा रहे पुर्व सांसद व राजद नेता मो. शहाबुद्दीन का चंपारण की धरती पर भव्य स्वागत किया गया. पूर्व सांसद के एनएच-28 से होकर पिपराकोठी-खजुरिया के रास्ते सिवान जाने की सूचना मिलते ही राजद के सैकड़ों कार्यकर्ता केसरिया विधानसभा के डुमरियाघाट स्थित चंपारण तटबंध पर जमा हो गये.

केसरिया प्रखंड राजद के अध्यक्ष मो. हातिम खां के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद का फूल-माला से स्वागत किया. उनके काफिले के डुमरियाघाट पहुंचते ही राजद जिंदाबाद के नारे से माहौल गूंज उठा. पूर्व सांसंद ने इस मौके पर कार्यकर्ताओं से कहा कि मुझे न्याय पर पूरा भरोसा था जिसके कारण मैं आज रिहा होकर आपके बीच पहुंचा हुं. शाम के करीब चार बजे वे डुमरियाघाट पहुंचे थे.

शहाबुद्दीन के जेल जाने के पीछे की कहानी
सिवान के तत्कालिन एसपी रत्न संजय और डीएम सीके अनिल द्वारा किये गये संयुक्‍त छापेमारी में शहाबुद्दीन के घर से पाकिस्‍तान में बने हथियार बरामद किए गए थे. यही नहीं उनके घर से जो एके-47 राइफल बरामद किए बरामद किए गए थे उस पर पाकिस्‍तानी ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री के छाप (मुहर) भी लगे थे. आपको बता दें कि इस तरह के हथियार केवल पाकिस्‍तानी सेना के लिए ही होते हैं.

छापेमारी में बाहुबली नेता के घर से अकूत जेवरात और नकदी के अलावा जंगली जानवरों शेर और हिरण के खाल भी बरामद हुए थे. छापेमारी के बाद उस वक्‍त के डीजीपी डीपी ओझा ने स्वीकार किया था कि शहाबुद्दीन का पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के साथ संबंध है. उन्होंने इसे साबित करने के लिए सौ पेज की रिपोर्ट भी पेश की थी. डीजीपी ओझा द्वारा शहाबुद्दीन के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के कारण उनका बिहार सरकार ने तुरंत तबादला करवा दिया था.

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गौरतलब है कि वर्ष 2001 में भी बिहार पुलिस ने शहाबुद्दीन के गिरेबान तक पहुंचने की कोशिश में उनके प्रतापपुर वाले घर पर छापेमारी की थी, लेकिन अंजाम बेहद दुखद हुआ था. शहाबुद्दीन के गुर्गों ने बेखौफ होकर पुलिस पर फायरिंग की थी. करीब तीन घंटे तक दोनों तरफ से हुई इस गोलीबारी में तीन पुलिसवालों की मौत हो गई थी. तीन घंटे चली गोलीबारी के बाद भी पुलिस को वहां से खाली हाथ ही लौटना पड़ा था. इस संगीन वारदात के बाद भी उस समय शहाबुद्दीन के खिलाफ कोई मजबूत केस नहीं बनाया गया था.
साहब ने पुलिस को जड़ दिया था थप्‍पड़
साल 2001 में राज्यों में सिविल लिबर्टीज के लिए पीपुल्स यूनियन की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि राजद सरकार कानूनी कार्रवाई के दौरान शहाबुद्दीन को संरक्षण दे रही थी. 2001 में ही पुलिस जब राजद के स्थानीय अध्यक्ष मनोज कुमार पप्पू के खिलाफ एक वारंट तामिल कराने पहुंची तो शहाबुद्दीन ने गिरफ्तारी करने आए अधिकारी संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था. शहाबुद्दीन के सहयोगियों ने पुलिस वालों की जमकर पिटाई कर दी थी.

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