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अच्छी सेहत के लिए सावन में शिवजी पर चढायें ये चीजें

भगवान शिव काल के भी काल हैं इसलिए महाकाल कहलाते हैं. इनकी कृपा होने पर गंभीर से गंभीर रोगों से मुक्ति मिल जाती है और सामने खड़ी मृत्यु भी टल जाती है. इसलिए इनकी प्रसन्नता के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप किया जाता है. लेकिन सावन में कुछ अन्य उपायों से भी आप शिवजी को प्रसन्न करके आरोग्य सुख का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.

क्षय रोग में लाभ के लिए

शिवपुराण में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को क्षय रोग (टीबी) हो गया है तो शिव चतुर्दशी के दिन उसे भगवान शिव का अभिषेक शहद से करना चाहिए. अगर यह उपाय सोमवार को किया जाए तो अतिशीघ्र लाभ मिलता है. अभिषेक करने के बाद शिवजी से जल्द स्वस्थ होने की विनती करें. इस उपाय के साथ ही योग्य चिकित्सक से औषधीय उपचार लेते रहना चाहिए.

अगर बुखार ठीक न हो रहा हो तो

लगातार दवाइयां लेने के बाद भी अगर आपका बुखार ठीक न हो रहा हो तो दवाई जारी रखने के साथ ही त्रियोदशी या शिव चतुर्दशी पर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और शिवजी से स्वास्थ्य लाभ की विनती करें. मान्यता है कि ऐसा करने से शीघ्र लाभ मिलता है.

अगर बच्चा हो दिमागी रूप से कमजोर

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अगर कोई बच्चा दिमागी रूप से कमजोर है तो दूध में शक्कर मिलाकर बच्चे के हाथों उस दूध से शिवलिंग का अभिषेक कराना चाहिए. शिवपुराण के अनुसार, ऐसा करने से दिमाग तेज होता है.


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मनोबल बनाए रखने के लिए

अगर कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से खुद को असुरक्षित महसूस करता है तो उसे शिवजी पर बिल्वपत्र अर्पित करते समय उसके साथ जल भी अर्पित करना चाहिए. इसके बाद उस बेल के पत्ते को उठाकर अपनी शर्ट की ऊपरवाली जेब में रख लें और पूरा दिन अपने साथ रखें और शाम के समय किसी वृक्ष के नीचे अर्पित कर दें या गमले में रख दें. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति का अकेलापन दूर होता है और शिवजी हमेशा उसके साथ रहते हैं.

बार-बार बीमार पड़ने की स्थिति में

जो लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं, उन्हें शिवजी पर धतूरा और भांग अर्पित करना चाहिए. आयुर्वेद में भांग और धतूरे को औषधि बताया गया है. इन्हें शिवलिंग पर अर्पित करते समय भगवान शिव से सेहत की कामना करें. देवी भागवत पुराण के अनुसार, समुद्र से निकला विष पीकर शिव ने उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया. इस विष की गर्मी शिव के मस्तिष्क पर चढ़ गई और वह अचेत हो गए. तब देवताओं ने उनके सिर पर धतूरा और भांग के पत्ते रखकर लगातार जल अर्पित किया, जिससे उनके सिर की गर्मी शांत हुई. तभी से शिव को भांग और धतूरा जल के साथ अर्पित किया जाता है.


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