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जब समाज की हर स्त्री सुरक्षित होंगी तभी होगा हैप्पी सावन : पद्मश्री उषा किरण खान


“जब समाज की हर स्त्री सुरक्षित होंगी, हरी साड़ी और हरी चूड़ी पहन कर समाज में सुरक्षित घूम सकें, तभी हैप्पी सावन होगा. नहीं तो कुछ महिलाएं हैप्पी सावन मनाएंगी कुछ लुटती रहेंगी.” यह बात आज पद्मश्री उषा किरण खान ने एक परिचर्चा में बोली.

दरअसल, मुजफ्फरपुर के बालिका गृह मामला को लेकर पटना के बीआईए हॉल में बिहार डायलॉग ने एक परिचर्चा का आयोजन किया. पहले महिलाओं ने अपने मन के भावों को व्यक्त किया. बाद में विशेषज्ञों ने बिहार के बाल गृहों की स्थिति का अवलोकन प्रस्तुत किया. चार घंटे चले इस आयोजन में वक्ता से श्रोता के बीच सवालों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था. चार घंटे के इस परिचर्चा में एक सुर में कहा गया कि यह घटना सभ्य समाज के माथे पर कलंक है. अब समाज और सरकार दोनों को मिलकर तत्काल इसका समाधान तलाशना होगा. जिसमें सोलह वर्ष की प्रियस्वरा से लेकर हिंदी और मैथिली की बुजुर्ग कथाकार उषा किरण खान समेत डॉ. बिंदा सिंह जैसी शख्सियत मौजूद रहे.

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चर्चा के दौरान पद्मश्री उषा किरण खान ने कहा कि यह बहुत ही दुखदायी है कि अब रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं. अब समाज को ही आगे आकर प्रतिकार करना होगा. उन्होंने कहा कि 30 साल पहले से आज भी हालात बहुत नहीं बदले. यह तभी बदलेंगे जब स्त्रियां खुद अपना अधिकार मांगेंगी. साथ ही डॉ.बिंदा सिंह ने कहा कि मुज्जफरपुर घटना पर सवाल उठाते हुए बोलीं, घटना के बाद क्या किसी मनोवैज्ञानिक ने उन लड़कियों से मुलाकात की? खबरों से पता चलता है कि वहां 15 लड़कियों ने अपने हाथ तक काट लिए हैं, वे कितनी मानसिक दबाव में होंगी इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता. वहीं, छात्रा प्रियस्वरा भारती ने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ वीमेन एंड चाइल्ड डिपार्टमेंट ने बिहार को महिलाओं के लिए असुरक्षित राज्य माना है. हर घंटे बिहार के किसी कोने में कोई लड़की छेड़खानी का शिकार होती है. आगे छात्रा ने सवाल उठाया कि जिनकी आवाज़ हम तक पहुंचती ही नहीं है. अगर उस जगह पर मैं होती तो क्या करती या आपलोगों में होते तो क्या करते.

परिचर्चा में आयी ऐपवा की अध्यक्ष मीना तिवारी ने सवाल उठाया कि सरकार आज भी टिस की रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही. ऐसा लगता है कि इस मामले को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है. सीबीआई जांच एक छलावा है. परिचर्चा में बिहार के बाल गृह संचालन की परेशानियों पर बातचीत हुई. संबोधन में अधिवक्ता केडी मिश्र, सेंटर डायरेक्ट के सचिव प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि बाल गृहों में काम करने वाले अक्सर अप्रशिक्षित होते हैं, उन्हें प्रशिक्षित किये जाने की जरूरत है. मुजफ्फरपुर मामले के उजागर होने पर जनहित याचिका दायर करने वाले वकील केडी मिश्रा ने कहा कि इस पूरे मामले में पॉस्को एक्ट का उल्लंघन हुआ है. टिस की जिस रिपोर्ट से यह सब उजागर हुआ उसे अब तक क्यों छिपाकर रखा गया है.