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अश्विनी चौबे जैसे को कौन बना देता है मंत्री?

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ashwini kumar choubey

Photo: Indian Express

ब्लॉग. पर्बिंद कुमार. रोज हम नेताओं के बयान देखते है. ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ अश्विनी चौबे की बात करने के लिए यह ब्लॉग लिख रहे है. कई ऐसा नेता हैं जो बड़े पदों पर रहते हुए शर्मनाक बयान देते रहते है और उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती. मणिशंकर अय्यियर का बयान भी याद आता है जब उन्होंने प्रधानमंत्री को नीच कहा था तब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था लेकिन अब फिर शामिल कर लिया गया. तो क्या अश्विनी चौबे पर भी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

सवाल मन में यही उठता है कि ऐसे नेताओं को मंत्री कौन बना देता है? क्या इसके लिए हम जनता जिम्मेदार नहीं है? हम क्यों ऐसे नेताओं को वोट देकर जिताते है? हम जान बुझ कर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाते है, क्युकी हम भी उन्ही की तरह है. हमें खुद को भी बदलना चाहिए. पार्टी लेवल पर न सोच कर इंडिविजुअल नेताओं को वोट करने से ही अच्छे नेता आगे बढ़ेंगे.

एक मंत्री, भारत के एक बड़ी पार्टी के अध्यक्ष को ‘नाली का कीड़ा’ कहता है वह भी सार्वजनिक रूप से, क्या ऐसे नेताओं को बोलते वक्त इतना भी शर्म नहीं आता कि वह भारत सरकार में मंत्री है.

बयान एक बार फिर सुनिए,

अश्विनी चौबे ने कहा, “प्रधानमंत्री गगन के जैसे हैं और जो आज कांग्रेस अध्यक्ष हैं उनका आकार कैसा, नाली के कीड़े जैसा” राहुल गांधी को मानसिक रूप से बीमार बताते हुए कहा कि उन्‍हें मेंटल सिजोफ्रेनिया की बीमारी है.

बीजेपी ने सिर्फ यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका व्यक्तिगत बयान है. अरे भाई वह आपके सरकार में मंत्री है, आप ऐसे नेताओं को क्यों रखे हुए है जिन्हें बोलने तक नहीं आता, काम क्या करेंगे. आप क्यों नहीं अनुसाशन कायम करने की कोशिश करते है और ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करते है? सवाल कई हैं लेकिन जवाब आजकल की राजनीति में नहीं मिलेगा लेकिन जनता को जरुर ऐसे नेताओं को सबक सिखलाना चाहिए.

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