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परंपरा के नाम पर शिक्षकों के वेतन पर नीतीश सरकार डाल रही डांका

teachers protesting

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कहते है किसी भी राज्य को विकसित बनाने के लिए वहां के युवाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है. युवा शिक्षित हो इसके लिए शिक्षक की जरूरत होती है. बिहार के शिक्षकों की हालत किसी से छिपी नही है. लाखों शिक्षकों को कई महिनों से वेतन तक नसीब नही हुआ है. ऐसी हालत में वह कैसे युवाओं को शिक्षित कर पाएंगे. आए दिन वह आंदोलन करते है, अपने हक का पैसा राज्य सरकार से मांगते है. मगर सरकार के कान पर जू तक नही रेंगती.

राज्य सरकार शिक्षकों को वेतन ना देने के पीछे राज्य के खजाने में पैसे की कमी बताती है. मगर हाल ही में शिक्षा विभाग की तरफ से विधानसभा बजट के बाद सभी विधायकों को महंगे उपहार दिए गए है. इन महंगे उपहार में फोन, घड़ी के साथ-साथ माइक्रोवेब भी शामिल है.

विधायकों को दिए गए उपहार में सबसे महंग उपहार शिक्षा विभाग की तरफ से दिया गया है. शिक्षा विभाग ने विधायकों को माइक्रोवेब दिया है. जिस राज्य में युवाओं को स्कॉर्लशिप देने के कलए पैसे नही. शिक्षकों को वेतन देने के लिए पैसे नही. वहां विधायकों को महंगे गिफ्ट देने के​ लिए पैसे कहां से आ रहे है.

विधायकों को उपहार बांटने के बाद विपक्ष ने शिक्षको के वेतन पर सवाल उठाते हुए शिक्षा विभाग से पूछा कि अगर अनके पास शिक्षकों को वेतन देने के लिए प्रयाप्त धन उपलब्ध नही है तो फिर विधायकों को देने के लिए धन कहां से आ रहा है.

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हद तो तब हो गई जब शिक्षा म़ंत्री अशोक चौधरी ने एक अजीबो गरीब बयान दे दिया. शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह माइक्रोवेब विधायकों को इसलिए दिया गया है ​ताकि विधायक विद्यालयों में जाए और वहां से मिड डे मील लेकर आए और माइक्रोवेब में गरम करके खाकर उसकी जांच कर सके.

शिक्षा मंत्री को छात्रों के मिड डे मील की इतनी ही चिंता है तो वह म​हीने से वेतन के लिए जंग लड़ रहे शिक्षकों को ही माइक्रोवेब दे देते. मिड डे मील की हालत सुधारने के लिए वहां के शिक्षक ही काफी थे. किसी विधायक को वहां जाकर अपना कीमती समय गवाने की जरूरत नही परती.

इस मामले पर उपमंख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह का उपहार देना पूरानी परंपरा है. जो सालो से चली आ रही है. बजट के बाद हर विभाग विधायकों को कुछ ना कुछ देता है. उन्होंने कहा कि इस उपहार को शिक्षकों के वेतन से जोड़कर ना देखा जाए.

हर परंपरा को समय और स्थान के साथ बदलना पड़ता है. बिहार के मौजूदा हालाद ऐसे नही है कि इतने महंगे उपहार परंपरा के नाम पर विधायकों में बांटा जाए. यह पैसा अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता का ही है, जिसपर पूरानी परंपरा के नाम पर डांका डाला जा रहा है.

राज्य के उद्योग मंत्री ने भी इस उपहार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली में तो इससे भी महंगा उपहार दिया जाता है. यह पूरानी परंपरा है. हालांकि उन्होंने बाद में यह भी कहा कि ज्यादा पैसे खर्च नही करना चाहिए. उद्योग मंत्री का यह बयान भविष्य की एक छवि प्रदर्शित करता है. इससे यह पता चलता है कि भविष्य में इससे भी महंगे उपहार बांटे जा सकते है.

-सुधाकर सिंह
(यह लेखक के अपने विचार है. डेली बिहार न्यूज़ डॉट इन लेखक के विचारों से सहमती या असहमति जाहिर नही करता है)

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