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बीएसएससी पेपर लीक कांड में सफेदपोशों का आखिर कब खुलाशा करेगी एसआईटी?

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फाइल फोटो


हितेश कुमार की रिपोर्ट : बिहार के चर्चित पेपर लीक कांड में गिरफ्तार सभी अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उनके द्वारा बताए गए उन सभी पैरवीकारों के नामों की जांच एसआईटी क्यों नहीं कर रही है. इस मामले में पिछले दिनों पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर अदालत से हस्तक्षेप करने की बात कही गई है.

गौरतलब है कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग के तत्कालीन सचिव परमेश्वर राम के गिरफ्तारी के बाद जांच के क्रम में उन्होंने कई परिवारों के नाम एसआईटी को बताया था. इसी दौरान आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और आईएएस सुधीर कुमार द्वारा मीडिया को दिए गए बयान में कहा गया था कि हमारे पास कई नेताओं के पैरवी के लिए फोन आ रहे हैं.

इन सभी सवालों को एसआईटी प्रमुख और पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक मनु महाराज टालते नजर आ रहे हैं. इन नामों की जांच के विषय में पूछने पर बताया कि ऐसे कोई नाम जांच के दायरे में नहीं है. जिसे संदेह के दृष्टि से देखा जाए. जबकि सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि करीब 36 नाम जिसमें राजनेताओं के अलावा कई आईएएस अधिकारी भी शामिल थे, पूर्व सचिव परमेश्वर राम ने बताया था.

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हालांकि अब तक इस मामले में 35 लोगों से ज्यादा को गिरफ्तार किया जा चुका है. अभी पिछले महीने दिल्ली से आनंद बरार को गिरफ्तार किया गया था. जिसे कई बार एसआईटी ने रिमांड पर भी लिया है. और उसने पूछताछ में क्रम में कई चौंकाने वाले खुलासे भी किये हैं. जबकि एसआईटी प्रमुख इन सभी खुलासों से साफ इंकार तो नहीं करते हैं, लेकिन इसे स्वीकार भी नहीं कर रहे हैं.

ज्यदा पूछने पर और अनुसंधान की बात कह कर सवाल को टाल जाते हैं. सवाल यह है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष और सचिव किसके इशारे पर इस प्रश्न पत्र लिक करने में अहम भूमिका अदा की है और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि एसआईटी उन नामों को उजागर करने से क्यों बच रही है? जिसे अध्यक्ष और सचिव ने उजागर किया था.

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