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DU अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम से नाराज टीचर्स

नई दिल्ली

जेएनयू के बाद अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में टीचर्स के लिए अटेंडेंस मसला बनकर आई हैं. यूनिवर्सिटी में अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम (एएमएस) लागू करने की तैयारी की जा रही है. टीचर्स का कहना है कि प्रशासन चुपचाप से कॉलेजों में स्टूडेंट्स के लिए नया ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम लागू कर रहा है, वह भी बिना किसी बॉडी से इसे पास किए बिना. टीचर्स का कहना है कि क्लास में ही अटेंडेंस लेना उनके लिए मुश्किल होगा, अभी वे क्लास के बाद रिकॉर्ड तैयार करते हैं. टीचर्स ने इस सिलसिले में वाइस चांसलर डॉ योगेश त्यागी को लिखा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर (डीयूसीसी) ने इस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए डेमो और ट्रेनिंग करवा ली है, मगर इसकी जानकारी टीचर्स को नहीं दी गई. कई कॉलेजों को इसे लागू करने के लिए भेज दिया गया है. टीचर्स ने वीसी से इस पर रोक लगाने की फौरन मांग की है.

डीयू के टीचर्स का कहना है कि अभी जो अटेंडेंस सिस्टम डीयू में लागू है, उसे डीयू की तय बॉडी से मंजूरी मिली है. डीयू के एग्जिक्यूटिव कमिटी (ईसी) मेंबर डॉ राजेश कुमार झा कहते हैं, इसके ऑर्डिनेंस में लेकर कोई संशोधन भी नहीं हुआ है. ऐसे में डीयूसीसी कैसे कॉलेजों को नया अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के लिए लिख सकती है? साथ ही, अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम को लेकर टीचर्स समेत किसी भी स्टेकहोल्डर से सलाह नहीं ली गई है.

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डीयू के चार कॉलेजों में इस सिस्टम का ट्रायल भी किया गया है. एक कॉलेज के अधिकारी का कहना है कि यह सिस्टम यूनिवर्सिटी ने ही तैयार किया है. अभी इसे जरूरी नहीं बताया गया है, लेकिन अगले साल से इसका जरूरी होना तय माना जा रहा है. टीचर्स ने साइबर सिक्यॉरिटी का मुद्दा उठाते हुए वीसी से पूछा है कि क्या इसे लागू करने से पहले कोई स्टडी की गई. अभी के सिस्टम को बदलने और नए सिस्टम को लाने की वजह भी पूछी गई है. वहीं, डीयू प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि स्टूडेंट्स की अटेंडेंस को मॉनिटर करने के लिए यह सिस्टम लाया जा रहा है. कई स्टूडेंट्स को इसकी वजह से एग्जाम देने से भी रोका गया है. बड़ी तादाद में इस साल लॉ स्टूडेंट्स एग्जाम देने से रोके गए थे, जिस पर स्टूडेंट्स कोर्ट भी गए हैं.

डीयू में अभी अटेंडेंस रजिस्टर में हाजिरी लेते हैं और हफ्ते या महीनेभर का डेटा हार्डकॉपी में भेजते हैं. अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम एक सॉफ्टवेयर है, जिसमें टीचर्स को स्टूडेंट्स की हाजिरी ऑनलाइन उसी वक्त क्लास से ही लेनी होगी. यह सिस्टम यूनिवर्सिटी इंट्रानेट से कनेक्ट होगा.

टीचर्स ने आर्थिक पहलु के बारे में आशंका जताई है. डॉ राजेश कुमार झा कहते हैं, इसे लागू करने से पहले डीयू की फाइनेंस कमिटी और एग्जिक्यूटिव कमिटी ने इस सिस्टम के लिए राशि की मंजूरी भी दी है. आचार्य नरेंद्रदेव कॉलेज में आरटीआई के जरिए जानकारी ली गई, तो पाया गया 2020 में वेंडर को एक करोड़ रुपये देने होंगे. इस बातों और सिस्टम को लेकर प्रशासन चुप है. यह भी कहा जा रहा है कि यह राशि स्टूडेंट्स और टीचर्स से बतौर यूजर चार्ज वसूली जाएगी.

टीचर्स का कहना है कि अगर किसी क्लास के लिए टीचर को बाहर जाना हो, तो हाजिरी कैसे होगी. यह सिर्फ टीचर्स को परेशान करने के लिए लाया जा रहा है, तभी इस पर चर्चा नहीं की गई. कई ईसी मेंबर्स ने भी इसका विरोध करते हुए वीसी से ऐतराज जताया है.


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