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बिहार के नियोजित शिक्षकों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर होगी सुनवाई

बिहार के नियोजित शिक्षकों का समान काम के समान वेतन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होने वाली है. इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे एवं उदय उमेश ललित की खंडपीठ में होगी. विदित हो कि पिछली सुनवाई के दिन नियोजित शिक्षकों के लिए वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया, सलमान खुर्शीद, विभा दत्त मखीजा ने पक्ष रखा था. आज की सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि अभी तक कोर्ट ने सरकार और नियोजित शिक्षकों के वकील दोनों का पक्ष सून लिया है.

कोर्ट के सामने नियोजित शिक्षकों के वकीलों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि आरटीई एक्ट के तहत बेहतर शिक्षा के लिए क्वालिटी टीचर पर राज्य सरकार पैसा खर्च नहीं करना चाहती और अगर क्वालिटी टीचर चाहिए तो उसके लिए पैसे तो खर्च करने होंगे ऐसे में राज्य सरकार इससे पीछे नहीं हट सकती. इससे पहले बिहार सरकार के वकील दिनेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राज्य सरकार आर्थिक तौर सक्षम नहीं है कि इन शिक्षकों को समान वेतन दे.

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तब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर इन शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया तो स्कूलों को बंद करना पड़ जाएगा. वहीं, केंद्र सरकार ने बिहार सरकार का समर्थन करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन का विरोध किया था. कोर्ट में केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के स्टैंड का समर्थन किया था और साफ़ कहा था कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को इसलिए लाभ नहीं दिया जा सकता क्योंकि बिहार के बाद अन्य राज्यों की ओर से भी इसी तरह की मांग उठने लगेगी.

बता दें कि बीते वर्ष अक्टूबर में पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्रदेश के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की भांति समान वेतन और सुविधा देने के निर्देश दिए थे. जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी. जिसकी वर्तमान सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश यूयू ललित और अभय मनोहर सप्रे कर रहे है.

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