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सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है जानिये

नौ ग्रहों में सूर्य को प्रमुख ग्रह माना जाता है.यदि कुंडली में सूर्य खराब स्थिति में हो, तो जातक को मान, सम्मान, यश, प्रतिष्ठा नहीं मिलती है.मगर, कई लोगों के पास कुंडली नहीं होती है, लिहाजा यह सवाल उठना लाजिमी है कि कोई व्यक्ति कैसे पता कर सकता है कि उसका सूर्य अच्छा है या नहीं.

इस बारे में इंदौर के ज्योतिषी पंडित खेमराज शर्मा ने बताया कि यदि व्यक्ति को घर में माता-पिता से प्यार और जरूरी सहयोग नहीं मिल रहा है.यदि ऑफिस में बॉस के साथ अच्छे संबंध नहीं बन पा रहे हैं.मेहनत करने के बाद भी सही लाभ नहीं मिल रहा है, तो कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती है.

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इन परिस्थितियों में सूर्य को जल चढ़ाने के लिए कहा जाता है.कुछ लोग सूर्य को नियमित रूप से अर्घ्य देते हैं, बावजूद इसके उनके जीवन में कोई लाभ नहीं होता है.इसका कारण बताते हुए पंडित खेमराज ने कहा कि यदि सही तरीके से सूर्य को अर्घ्य नहीं दिया जाए, तो पूरे जीवन सूर्य को जल चढ़ाने से कोई लाभ नहीं होगा.


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उन्होंने बताया कि सूर्य को अर्घ्य देते समय दोनों हाथ सिर के ऊपर होने चाहिए.जब जल लोटे से गिर रहा हो, तो उस जल की धार से भगवान सूर्य का दर्शन करते हुए उनकी कृपा पाने के लिए विनती करनी चाहिए.इसके साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि अंगूठा लोटे से छू न रहा हो.

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पंडित खेमराज ने इस प्रक्रिया के पीछे का दर्शन भी बताया.उन्होंने कहा कि सूर्य में सोलर एनर्जी होती है.जल उसे जल चढ़ाया जाता है, तो हाइड्रो एनर्जी उसके साथ मिलकर व्यक्ति के शरीर में दोनों तरह की ऊर्जा को बढ़ाती है.यदि सही तरह से सूर्य को अर्घ्य दिया जाए, तो 30 दिनों के भीतर ही व्यक्ति को बदलाव दिखने लगते हैं.


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