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गूगल डूडल मना रहा कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्मदिन, जानिए इस महान कवयित्री की कहानी

न्यूज़ डेस्क: सर्च इंजन गूगल ने आज हिंदी की लोकप्रिय कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी महादेवी वर्मा को उनके जन्मदिन पर याद किया. महादेवी वर्मा को हिंदी साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 27 अप्रैल 1982 को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया. हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं. वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं.


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आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है. कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती” भी कहा है. महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी. वे उन कवियों में से एक हैं जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की. न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे.

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उन्होंने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और शृंगार से सजाया कि दीपशिखा में वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई और उसने केवल पाठकों को ही नहीं समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया. उनकी शादी महज नौ साल की उम्र में 1916 में हो गई थी. वह शादी के बाद अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अपने घर में ही रहीं. गूगल के मुताबिक, महादेवी वर्मा को लेखक बनने के लिए प्रोत्सहन उनकी मां की ओर से मिला. उनकी मां ने ही महादेवी को संस्कृत और हिंदी में लिखने को प्रोत्साहित किया.

महादेवी वर्मा की आत्मकथा ‘मेरे बचपन के दिन’ ने उस समय के बारे में लिखा है, जब एक लड़की को परिवार पर बोझ समझा जाता था. महादेवी वर्मा को 1956 में पद्मभूषण, 1979 में साहित्य अकादमी फैलोशिप और 1988 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया गया. उनका 11 सितंबर 1987 को निधन हो गया था.


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