आज से केंद्र शासित प्रदेश बना कश्मीर और लद्दाख, देखें कौन-कौन से नए नियम हुए लागू

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पांच अगस्त को देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने जो ऐतिहासिक फैसला लिया था, वो आज (31 अक्टूबर) से लागू हो गया है. देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर आज से दो नए केंद्र शासित प्रदेश वजूद में आ गए हैं. ये प्रदेश हैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. इसी के साथ ही आज से भारत का मस्तक कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में न्यू कश्मीर ने दस्तक दे दी है. संविधान का अस्थायी प्रावधान अनुच्छेद 370 आज से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है, अब इसका जिक्र संवैधानिक बहस, राजनीतिक रैलियों और बौद्धिक बहस तक सीमित रह गया है.

जम्मू कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश में पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी और लद्दाख, चंडीगढ़ की तरह विधायिका के बिना केन्द्र शासित प्रदेश होगा, यानी कि यहां पर विधानसभा नहीं होगी.

यहां की पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन होगी. केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल होगा और इसकी विधानसभा की अधिकतम सीमा 107 होगी जिसे डिलिमिटेशन के बाद 114 तक बढ़ाया जा सकेगा.

अनुच्छेद 370 खत्म होते ही 35-A का भी वजूद खुद ब खुद खत्म हो गया है.  35-A अनुच्छेद-370 का ही एक हिस्सा था. ये प्रावधान जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा को ‘स्थायी निवासी’ परिभाषित करने और उन नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था. इस प्रावधान को भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति से तत्कालीन राष्ट्रपति के आदेश पर जोड़ा गया. राष्ट्रपति ने 14 मई 1954 को इस आदेश को जारी किया था. इस प्रावधान के खत्म होते ही जम्मू-कश्मीर के अलावा दूसरे राज्यों के नागरिक भी नियमों का पालन करते हुए वहां पर जमीन-मकान खरीद सकेंगे. इसके अलावा दूसरे राज्यों के लोग यहां पर नौकरियां और बिजनेस कर पाएंगे.

पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता था, लेकिन अब जब भी जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा गठित होगी, इस विधानसभा का कार्यकाल 5 साल होगा.

पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता था, लेकिन अब जब भी जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा गठित होगी, इस विधानसभा का कार्यकाल 5 साल होगा.

31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर के लोगों की दोहरी नागरिकता खत्म हो गई है. इससे पहले वहां के लोगों को जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिली हुई थी, इसके अलावा वे भारत के भी नागरिक थे अब वे सिर्फ भारतीय नागरिक हैं. 

Article 370 खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा नहीं होगा.

दोनों प्रदेशों के लिए एक ही हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और  लद्दाख भले ही अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे लेकिन दोनों राज्यों के लिए एक ही हाई कोर्ट होगा. इस वक्त जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक हाई कोर्ट है. ये अदालत सर्दियों में जम्मू में लगती है जबकि गर्मियों में श्रीनगर में काम करती है.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्र का प्रतिनिधित्व राज्यपाल नहीं बल्कि लेफ्टिनेंट गवर्नर करेंगे. अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ ही यहां से राज्यपाल की प्रथा खत्म हो गई है. अब इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति करेगा. गिरिश चंद्र मुर्मू जम्मू-कश्मीर के पहले एलजी होंगे, जबकि राधा कृष्ण माथुर लद्दाख के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर बनेंगे.