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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, महाकाल पर चढ़ेगा सिर्फ RO का पानी, जानिए इसके पीछे का राज़

न्यूज़ डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक अनोखा आदेश दिया है, उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में ज्योतिर्लिंग को नुक्सान से बचाने के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से दिए गए सुझावों पर आज अपना फैसला सुनाया और फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ज्योतिर्लिंग पर सिर्फ RO का ही पानी चढ़े. साथ ही कोर्ट ने प्रति श्रद्धालु दूध और दूसरी पूजन सामग्री की सीमा सीमित करने का फैसला सुनाया है.


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कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए मंदिर की परंपराओं में हस्तक्षेप करने से अपने कदम पीछे हटा लिए है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर में किस तरह की पूजा अर्चना होनी चाहिए ये तय करना कोर्ट का काम नहीं हे, हलाकि की शिवलिंग को बचाना अनिवार्य है इसलिए आज से महाकाल पर केवल RO पानी ही चढ़ाया जायेगा.

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कोर्ट के अन्दर एन मुद्दों पर चर्चा हुई थी. अगर संभव हो तो पुजारियों के अलावा बाकी लोगों को गर्भ गृह में न जाने दिया जाए. अगर ऐसा नहीं हो सकता तो लोगों की संख्या सीमित कर दी जाए. पूरा दिन ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने से नुकसान पहुंच सकता है, इसे सीमित किया जाए. दूध और दूध से बनी चीज़ों, घी और शहद का सिर्फ प्रतीकात्मक इस्तेमाल हो. यानी सुबह होने वाली भस्म आरती के दौरान पुजारी इन्हें अर्पित करें. बाकी समय इस पर रोक लगे.

शिवलिंग पर गुड़, शक्कर जैसी चीज़ों का लेप न लगाया जाए. अगर धार्मिक कारणों से इनका इस्तेमाल ज़रूरी है तो इसे बेहद सीमित कर दिया जाए. फूल और बेल पत्र का भी सीमित इस्तेमाल हो. शिवलिंग के लगातार इनसे ढंके रहने से नमी हो जाती है. साथ ही पत्थर तक हवा का सही प्रवाह भी नहीं होता. धातु की बाल्टी और लोटों की जगह लकड़ी या बढ़िया प्लास्टिक के बर्तन इस्तेमाल हों. इससे मंदिर के अंदर फर्श और दीवारों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होगा.

मंदिर परिसर को मूल स्वरूप में लाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं. मरम्मत के काम के लिए टाइल्स जैसी आधुनिक चीज़ों का इस्तेमाल न किया जाए. तमाम मूर्तियों और पुरातात्विक महत्व की चीज़ों का संरक्षण वैज्ञानिक तरीके से किया जाए.


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