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बार-बार जाते है पेशाब तो समझिये ये हैं आपको दिक्कत

हेल्थ डेस्क

गाॅल ब्लैडर और किडनी में स्टोन होने पर भी बार-बार यूरीन जाना पड़ता है, लेकिन ज्यादातर लोग बार-बार यूरीन जाने को अवॉइड करते रहते हैं. जबकि ऐसा किसी बीमारी की वजह से होता है. चौबीस घंटे में छह-सात बार से ज्यादा यूरीन जाना फीक्वेंट यूरिनेशन कहलाता है. पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने के कारण भी यूरीन ज्यादा जाना पड़ता है. यह बीमारी व्यक्ति के सामान्य रुटीन को खराब कर देती है. वहीं, उसके स्लीप साइकिल पर भी असर डालती है. जब एक व्यक्ति दिन में तीन लीटर से ज्यादा यूरीन पास करता है, तो यह फुलेरिया के नाम से जाना जाता है. हालांकि इसे एक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है. डायबिटीज में इसके लिए ध्यान देने की जरूरत है. यूरोलॉजिस्ट डाॅ. एसएस यादव से जानते हैं इसे कैसे पहचानें.

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट

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फीवर, नोजिया और उल्टी आना, कमर और साइड में दर्द, भूख या प्यास का बढ़ना, यूरीन पास करते समय दर्द महसूस होना, यूरीन का रंग बदलना, यूरीन से ब्लड आना. यही नहीं, कई बार लोग सोचते हैं कि पानी ज्यादा पीना चाहिए. इस वजह से भी खाना ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं. इससे भी व्यक्ति यूरीन ज्यादा जाता है. इसके अलावा साइकोजेनिक फैक्टर भी इसका एक कारण है. इसमें व्यक्ति की सोच के कारण यूरीन की फ्रिक्वेंसी बढ़ती है. रात में एक बार या बिल्कुल यूरीन नहीं जाता है.


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फ्रिक्वेंसी यूरिनेशन के कारण

यूरीन में इंफेक्शन व गाॅल ब्लैडर और यूरेटर में स्टोन के कारण भी ऐसा है. वहीं, ब्लैडर में मैलिग्नेंसी होना भी इसकी वजह है. एंग्जाइटी, स्ट्रोक, ब्रेन और नर्वस सिस्टम में प्रॉब्लम, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेल्विक एरिया में ट्यूमर, ओवर एक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम, ब्लैडर कैंसर, ब्लैडर और किडनी में स्टोन, कैंसर ट्रीटमेंट के समय पेल्विस में रेडिएशन होना, सेक्सुअली ट्रांसमिट इंफेक्शन

प्रोस्टेट से होने वाली समस्याएं

यूरीन का रुक-रुक कर आना, यूरीन आने में ज्यादा समय लगना, ट्यूमर होने पर यूरीन करते वक्त ब्लड आना शुरू हो जाता है. यूरीन की थैली में यूरीन इकट्ठा होने पर नाभि के नीचे वाली हड्डी पर दर्द महसूस होता है. ब्लैडर को रिलैक्स करने के लिए भी ट्रीटमेंट देते हें. एंटी कोलीनेर्जिक मेडिसिन से एक्टीविटीज कम की जाती है. यूरीन कम करने के लिए भी मेडिसिन दी जाती है.


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