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इस तरीके से ले साँस, होगा फायदा

जिंदगी में हर चीज पर ध्यान देते हैं, पर सांस पर नहीं। वजह, हमें लगता है कि सांस अपने आप आ जाएगी। सांस आ भी जाती है लेकिन जो अपने आप आती है, वह पूरी नहीं होती। हमें कोशिश करके सही ढंग से सांस लेने की आदत डालनी चाहिए.ऐसा न करने पर हमारी ‘क्वॉलिटी ऑफ लाइफ’ खराब होती है.

हम सही तरीके से सांस ले रहे हैं या नहीं, इसे पहचाने का आसान तरीका है.अभी आप सांस भरें और देखें कि आपका पेट अंदर जा रहा है या बाहर.कमर सीधी करके बैठें.फिर पेट पर हाथ रखें.सांस लेने और निकालने के साथ पेट भी बाहर और अंदर जाएगा.लेटकर चेक करना चाहते हैं तो पेट पर कोई किताब रख लें.किताब के ऊपर-नीचे जाने से सांस का अंदाजा लगा सकते हैं.

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अगर सांस भरते वक्त पेट बाहर जाए तो आप ठीक तरीके से सांस ले रहे हैं.अगर पेट अंदर जाए तो गलत.इसी तरह सांस निकालते हुए पेट अंदर की तरफ जाना चाहिए.दरअसल, जब सांस लेते हैं तो लंग्स फैलते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे कि हवा भरे जाने पर बैलून फैलता है.सांस बाहर निकालते हैं तो लंग्स सिकुड़ते हैं, वैसे ही जैसे हवा निकलने पर बैलून सिकुड़ जाता है.वैसे, जब तक सांस लेने का सही तरीका मालूम न हो या फिर इसपर गौर न करें तो ज्यादातर लोगों का पेट सांस लेते हुए अंदर आता है और छोड़ते हुए बाहर.ऐसा तनाव की वजह से होता है। ऐसे में चेस्ट टाइट होती है और डायफ्राम कड़क होकर ऊपर हो जाता है.इससे पेट बाहर को जाता है। यह गलत तरीका है.इससे लंग्स और हार्ट पर दबाव पड़ता है.

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अब सवाल है कि जब सांस लंग्स से लेते हैं तो पेट अंदर या बाहर क्यों जाता है? इसका जवाब है कि पेट और लंग्स के बीच होता है डायफ्राम.जब लंग्स पर दबाव पड़ता है तो डायफ्राम पर भी दबाव होता है और उसका प्रेशर पेट पर पड़ता है.यही वजह है कि लंग्स से सांस लेने या निकालने पर पेट बाहर और अंदर होता है.


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