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बालों के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे ,छह महीने में बदल जाते है

हर छह महीने में बदल जाते हैं बाल, बालों के निर्माण में हार्मोन्स की मुख्य भूमिका होती है.सिर के बाल प्रति माह लगभग डेढ़ इंच की दर से बढ़ते हैं.इनकी आयु दो से आठ साल तक होती है.उसके बाद पुनः नए बाल आते हैं.

वैज्ञानिक कहते हैं, बालों के निर्माण के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं.बालों का 95 फीसदी हिस्सा कैरोटीन नामक प्रोटीन का बना होता है.कैरोटीन एक ऐसा हार्मोन है, जो 18 तरह के अमीनो एसिड से बनता है.बालों में कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन और सल्फर मौजूद होते हैं.सिर की त्वचा के अंदर वाले हिस्से को हेयर फॉलिकल (Hair Follicle) कहते हैं, जबकि ऊपर वाले हिस्से को हेयर शाफ्ट (Hair Shaft) कहते हैं.हेयर फॉलिकल बनने में 22 सप्ताह का समय लगता है.

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शरीर में लगभग 5 मिलियन (50 लाख) हेयर फॉलिकल होते हैं.सिर पर कुल दस लाख हेयर फॉलिकल होते हैं.जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमारे सिर के बालों का घनत्व कम होता जाता है.इसका कारण यह है कि जब बड़े होते हैं, तो हमारे सिर का आकार भी बड़ा होता जाता है.चूंकि बालों के निर्माण में हार्मोन्स की मुख्य भूमिका होती है, इसलिए महिलाओं और पुरुषों में बाल निर्माण की प्रक्रिया भिन्न होती है.सिर के बाल प्रति माह लगभग डेढ़ इंच की दर से बढ़ते हैं.ये दो से आठ साल तक बढ़ सकते हैं.दूसरी ओर शरीर के अन्य भागों के बाल एक निश्चित वृद्धि के बाद रुक जाते हैं.शरीर के बाल हर छह माह बाद बदलते रहते हैं.

मनुष्य अधिक कपड़े लादकर बालों को शुद्ध वायु खींचने से रोकता है, फलस्वरूप बीमार पड़ता है.शरीर में अन्य स्थानों की अपेक्षा सिर के बालों का महत्व अधिक है.शायद यही वजह है कि किसी प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए बाल रखने की प्रथा है.इसके सूक्ष्म कारणों पर विचार करने से विदित होता है कि बाल रखने से मनोबल की वृद्धि होती है और दृढ़ता आती है.उस दृढ़ता के कारण अनुष्ठान करने वाले साधक अपने कार्यक्रम पर दृढ़ रहते हैं और उसे निर्विघ्न पूरी कर लेते हैं.यह अकारण नहीं है कि गुरु गोविंद सिंह जी ने भी बालों के
महत्व पर जोर दिया और उसे लोगों के स्वाभिमान से जोड़कर देखा.


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