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प्रेग्नेंसी में इन एक्सरसाइज को कर कई बिमारियों पाए छुटकारा

प्रेग्नेंसी के आठ महीने पूरे होने पर चिड़चिड़ापन, झुंझलाहट, वॉमिटिंग, थकान रहना सामान्य परेशानी है. इस दौरान वजन बढ़ने के साथ-साथ महिला में आलस भी आ जाता है. ऐसे में मूड स्विंग यानी पल-पल में मूड बदलने पर एक्सरसाइज, योग, प्राणायाम और रेगुलर वॉक करके महिलाएं फिट और खुश रह सकती हैं.

बटरफ्लाई यह एक्सरसाइज प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने से शुरू कर सकते हैं. यह पेल्विक एरिया को प्रभावित करती है. साथ ही पैरों और थाइज एरिया में लचीलापन बढ़ाती है. थाइज की स्ट्रेचिंग भी हो जाती है. लोवरबॉडी की स्ट्रेचिंग होने से इस हिस्से में जमा फैट भी धीरे—धीरे कम होता है. जिससे थकान कम होती है.

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कुछ योग और प्राणायाम भी किए जा सकते हैं. जैसे अनुलोम—विलोम और शवासन. अनुलोम -विलोम से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनता है. इसे करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहेगा. स्ट्रेस फ्री रहने के लिए यह जरूर करें. जमीन पर ऐसी स्थिति में बैठें, जिसमें उन्हें आराम महसूस हो इसके बाद दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दायां छिद्र बंद करें और अपनी सांस अंदर की ओर खींचे. फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बांई ओर का छिद्र बंद कर दें और अंगूठे को हटाकर दाईं ओर से सांस छोड़ें. इस प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएं.

मेंटल पीस और स्ट्रेस रिलीज के लिए शवासन करें- प्रेगनेंसी के दौरान शवासन करने महिला को मानसिक शांति मिलती है. इस आसन से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छी तरह होता है. इसके लिए बिस्तर पर सीधा लेट जाएं. अपने हाथ और पैरों को खुला छोड़ दें. फिर पूरी तरह स्ट्रेस फ्री हो जाएं. धीरे-धीरे लंबी सांस ले और छोड़ें. इससे थकान,और स्ट्रेस दूर होगा.


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