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सुखी वैवाहिक जीवन चाहिए तो रामायण की ये 5 बातों को ध्यान रखे

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भाग दौर भरी जिन्दगी में शादी के बाद छोटे-छोटे वाद-विवाद होना आम बात है, लेकिन जब ये बढ़ने लगे तो संभल जाना चाहिए. मैरिड लाइफ में यहां बताई जा रही सात बातों का ध्यान रखेंगे तो पति-पत्नी हमेशा खुश रहेंगे. ये सात बातें रामायण में श्रीराम-सीता के जीवन में देखने को मिलती हैं.

संयम:

संयम यानी समय-यमय पर उठने वाली मानसिक उत्तेजनाओं जैसे- कामवासना, क्रोध, लोभ, अहंकार तथा मोह आदि पर नियंत्रण रखना. राम-सीता ने अपना संपूर्ण दाम्पत्य बहुत ही संयम और प्रेम से जीया. वे कहीं भी मानसिक या शारीरिक रूप से अनियंत्रित नहीं हुए.

संतुष्टि

संतुष्टि यानी एक दूसरे के साथ रहते हुए समय और परिस्थिति के अनुसार जो भी सुख-सुविधा प्राप्त हो जाए उसी में संतोष करना. दोनों एक दूसरे से पूर्णत: संतुष्ट थे. कभी राम ने सीता में या सीता ने राम में कोई कमी नहीं देखी.

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संतान

दाम्पत्य जीवन में संतान का भी बड़ा महत्वपूर्ण स्थान होता है। पति-पत्नी के बीच के संबंधों को मधुर और मजबूत बनाने में बच्चों की अहम् भूमिका रहती है। राम और सीता के बीच वनवास को खत्म करने और सीता को पवित्र साबित करने में उनके बच्चों लव और कुश ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

एक दूसरे की भावना:

पति-पत्नी के रूप में एक दूसरे की भावनाओं का समझना और उनकी कद्र करना। राम और सीता के बीच संवेदनाओं का गहरा रिश्ता था। दोनों बिना कहे-सुने ही एक दूसरे के मन की बात समझ जाते थे।

पांचवीं बात है संकल्प

पति-पत्नी के रूप अपने धर्म संबंध को अच्छी तरह निभाने के लिये अपने कर्तव्य को संकल्पपूर्वक पूरा करना.