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कृष्ण भगवान, विष्णु भगवान के 8 वां अवतार थे

आरा

कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हर साल हिंदू धर्म के लोगों द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. यह भगवान कृष्ण के जन्म वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है.भगवान कृष्ण एक हिंदू देवता है जिनका जन्म पृथ्वी पर मानव जीवन को बचाने के लिए और भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए हुआ था. यह माना जाता है कि कृष्ण भगवान विष्णु भगवान का 8वाँ अवतार थे.भगवान कृष्ण को गोविंदा, बालगोपाल , कान्हा, गोपाल आदि (108 के आसपास) जैसे कई नामों से जाना जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय से हिंदू धर्म के लोगों द्वारा भगवान कृष्ण की उनकी विभिन्न भूमिकाओं और शिक्षाओं (जैसे कि भगवद गीता की शिक्षाए ) के लिए पूजा की जाती है।हिंदू कैलेंडर के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म श्रावण के महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी के 8वे दिन को आधी रात को हुआ था. भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों के लिए इस धरती पर जन्म लिया और विभिन्न भूमिकाओं जैसे शिक्षक, गुरु, दार्शनिक, भगवान, प्रेमी आदि को निभाकर विभिन्न रूपों की प्रतिमा की पूजा का प्रदर्शन किया। वो एक बांसुरी और सिर पर एक मोर पंख के साथ एक भगवान है. कृष्णा अपने मानव जन्म के दौरान अपनी रासलीलाओं और अन्य गतिविधियों के लिए बहुत प्रसिद्ध है.

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भारत के कई क्षेत्रों में कृष्ण जन्माष्टमी का महोत्सव भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में कई गतिविधियों और उत्साह के साथ मनाया जाता है. हम हर साल अगस्त या सितंबर के महीने में बड़े उत्साह के साथ जन्माष्टमी की तैयारी करते है और जन्माष्टमी का जश्न मनाते है। लोग जन्माष्टमी पर पूर्ण भक्ति और समर्पण के साथ कृष्ण भगवान् की पूजा करते है. यह प्रतिवर्ष भाद्रपद महीने में आठवें दिन मनाई जाती है. लोग उपवास रखकर पूजा करके भक्ति गीत गाते है. भगवान कृष्ण का सम्मान करने के लिए भक्त लोग अपने घर और मंदिर में एक रंगीन झूला बनाते है और उससे फूलों,पत्तियों के साथ सजाते है.भारत के कई क्षत्रो में भगवान कृष्ण के जीवन के नाटकीय प्रदर्शन को दिखाने के लिए एक बड़े स्तर पर रास लीला और दही हांडी का आयोजन किया जाता है. एक छोटे लड़के को रासलीला और दही हांडी का प्रदर्शन करने के लिए एक कृष्ण के रूप में सजाया है. ये उत्सव अलग-अलग रस्मों और मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है.विवाहित महिलाएं भगवान कृष्ण के रूप में भविष्य में एक ही बच्चे को पाने के लिए एक बहुत ही मुश्किल कृष्ण जन्माष्टमी के दिन का उपवास रखती है. कहीं न कहीं अविवाहित महिलाएं भी इसी कारण से उपवास रखकर भगवान कृष्ण का आशीर्वाद पाती है.वे भोजन, फल और पानी का पूरे दिन के लिए त्यागकर मध्य रात में भगवान कृष्णा को भोग लगाकर फिर अपना उपवास खोलती है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार एक महिला जब दोनों में से किसी भी एक या तो अष्टमी तिथि या रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो जाए तो अपना उपवास खोल सकती है.अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समय के अंत के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी पर उपवास की अवधि में वृद्धि हो सकती है.

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