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देखें कैसे वक्त के साथ बदलते रहा सलवार कमीज का स्टाइल

जब भारत ही पहली महिला प्रफेशनल पहलवान कविता दलाल उर्फ कविता देवी रिंग में उतरीं, तो जानते हैं उन्‍होंने क्‍या पहन रखा था? उस कविता केसरिया रंग का सलवार कमीज पहनकर और दुपट्टे कसके कमर में बांधकर दो-दो हाथ करने रिंग में उतरी थीं.सलवार कमीज पहनने के उनके इस आइडिया ने उनके भारतीय होने पर देशवासियों को गर्व कराया.खैर ये तो बात रही पहलवान के सलवार-कमीज पहनने की.भारतीय महिलाओं के बीच सलवार-कमीज या कहें सूट का यह पहनावा प्राचीन काल से लोकप्रिय है.हालांकि इसको पहनने की शुरुआत मध्‍य-पूर्व एशिया से हुई.

पाकिस्‍तानी महिलाओं के लिए भी यह राष्‍ट्रीय परिधान है.भारत में य‍ह मुगल शासन काल से पहना जा रहा है.उस वक्‍त इसे महिला और पुरुष दोनों पहना करते थे.पहलवान कविता देवी ने भी अपना हुनर दिखाने के लिए इसी पहनावे को चुना.समय के साथ-साथ इस पहनावे में भी कई प्रकार के बदलाव होते रहे.

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डिजायनर मोनिका शाह का कहना है कि उन्‍हें सलवार-कमीज के साथ किए जाने वाले प्रयोग बहुत पसंद आते हैं.मोनिका कहती हैं कि आजकल डिजायनर सलवार-कमीज में समय के साथ नए-नए बदलाव करते हैं, जो कि देखने में भी काफी खूबसूरत लगते हैं.इसके साथ-साथ इसके कंफर्ट लेवल का भी ध्‍यान रखा जाता है.आजकल सलवार के अलावा इसमें महिलाएं प्‍लाजो, धोती, पेंट्स, सिगरेट पेंट्स और स्‍कर्ट भी कैरी करती हैं.वहीं कुर्ते या कमीज की जगह पर केप स्‍टाइल टॉप, जैकेट्स और लॉन्‍ग कुर्ते ने ले ली है.


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गर्मियों के मौसम में परफेक्‍ट आउटफिट

सलवार-कमीज को गर्मियों के लिए परफेक्‍ट आउटफिट माना जाता है.समय के साथ-साथ इसकी फिटिंग में भी काफी परिवर्तन आया है.70 के दशक में टाइट-फिट सूट का चलन था तो उसके बाद लॉन्‍ग कुर्ता और जेनी स्‍टाइल सलवार का फैशन आया.उसके बाद 80 के दशक में चूड़ीदार, पटियाला और धोती पहनी जाने लगी.इस दशक की शुरुआत में डिजायनरों ने अनारकली सूट भी निकाला, जो कि बॉलीवुड की फिल्‍मों में भी काफी देखने को मिला.पिछले 3-4 साल से सलवार-कुर्ते में कुछ ज्‍यादा ही प्रयोग देखे गए.

साड़ी बनाम सूट

हालांकि सूट की तुलना जब साड़ी से होती है तो यहां यह पहनावा मात खा जाता है.खासकर क‍ि सोशल मीडिया के जमाने में.जहां अब बाकायदा आप इस 6 गज की साड़ी को पहनने का तरीका भी सीख सकते हैं.इसमें कोई दोराय नहीं है कि साड़ी को पारंपरिक परिधान का दर्जा दिया गया है.मगर सलवार-कमीज में मिलने वाले आराम का कोई मुकाबला नहीं है.वैसे देखा जाए जो भारतीय पहनावे में दोनों का अपना एक अलग-अलग स्‍थान है.


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