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बिहार के गाँवों में अब भी 65 प्रतिशत लोग भूमिहीन

पटना. डीबी डेस्क

वर्ष 2011 की सामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना ने करीब 80 सालों बाद देश और बिहार के लोगों की सामाजिक, जातीय और आर्थिक प्रगति की सही-सही तसवीर सामने रखी है. कल ही केंद्र सरकार ने इससे सम्बंधित आंकड़े जारी किए हैं हालांकि जातीय आंकड़ो को फिलहाल गुप्त रखा गया है.
नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि देश के सिर्फ 4.6 प्रतिशत ग्रामीण परिवार आयकर देते हैं, जबकि वेतनभोगी ग्रामीण परिवारों की संख्या 10 प्रतिशत है.
इसके अनुसार, बिहार के कुल ग्रामीण परिवारों में से 65 प्रतिशत के पास कोई जमीन नहीं है, वहीँ देश स्तर पर यह आंकड़ा 56  है. बिहार के गांवों में सिर्फ 3.89 फीसदी परिवार सरकारी नौकरी में हैं और 54.33 फीसदी भूमिहीन परिवार मजदूरी करते हैं. सरकारी नौकरी का राष्ट्रीय औसत पांच फीसदी है.
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इन आंकड़ों में कुछ बहुत महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं. जैसे-
1. बिहार में अनुसूचित जाति के करीब 85 हजार ग्रामीण परिवारों (2.83 फीसदी) की आय 10 हजार रुपये मासिक से ज्यादा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 4.69 फीसदी है. राज्य में सिर्फ आठ हजार अजा परिवारों के पास चारपहिया वाहन हैं. 22 फीसदी के पास कोई फोन नहीं है.
2. देश के कुल ग्रामीण परिवारों में से 30.10 } परिवार जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 18.42 फीसदी है. बिहार में 1.25 करोड़ ग्रामीण परिवार (70.59 फीसदी) दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि देश में 9.16 करोड़ (51.14 प्रतिशत) परिवार दिहाड़ी से अपनी रोजी कमाते हैं. बिहार में 54.33 फीसदी भूमिहीन परिवार अनियमित रूप से मजदूरी करते हैं.
3. ग्रामीण परिवारों के पास मकान के मामले में बिहार जम्मू-कश्मीर को छोड़ बाकी सबसे आगे है. देश में 94 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास मकान हैं, जबकि बिहार में 98.81 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास अपना मकान है, जिनमें  57 फीसदी कच्चे व 42 फीसदी पक्के मकान हैं.
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