Breaking News
November 17, 2018 - अरवल : शहर तेलपा में संस्कृति कार्यक्रम आयोजित। इस मौके पर एसडीएम ने कहा सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मिलता है प्रेम भाईचारा को सम्बल
November 17, 2018 - लालू यादव की सेहत हुई खराब, राजद ने PM मोदी और नीतीश को बताया जिम्मेदार
November 17, 2018 - RLSP पर इस विधायक ने ठोका दावा
November 17, 2018 - 42वें चीफ जस्टिस बने एपी शाही, राज्यपाल ने दिलाया शपथ
November 17, 2018 - महज कुछ घंटों में कुशवाहा करेंगे बड़ा ऐलान
November 17, 2018 - नीतीश कैबिनेट की बैठक में दो बड़े ऐलान
November 17, 2018 - आज उपेंद्र कुशवाहा जायेंगे महागठबंधन में?
November 16, 2018 - तेजस्वी यादव ने सीबीआई और सुशील मोदी के बीच सांठगांठ की खोली पोल
November 16, 2018 - तेज प्रताप को बुलाने के लिए माँ ने की अपील
November 16, 2018 - पीयू में बजी चुनावी बिगुल, तिथि की हुई घोषणा

sc/st एक्ट को लेकर सुप्रीमकोर्ट से स्वर्णो के लिए आई है अच्छी खबर

शेयर कर और लोगों तक पहुंचाए

supreme court

मोदी सरकार द्वारा किये गए एससी-एसटी संशोधन कानून को अब सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई है. सुप्रीमकोर्ट ने इस कानून को अंसवैधानिक करार देने से पहले सरकार से इसका पक्ष जानना चाहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते जवाब मांगा है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न कानून के अमल पर रोक लगाई जाए.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग की, जिस पर पीठ ने कहा कि बिना सरकार का पक्ष सुने बिना कानून के अमल पर रोक नहीं लगाई जा सकती. दो वकील-प्रिया शर्मा, पृथ्वी राज चौहान और एक NGO ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के संशोधन कानून को चुनौती दी है.

याचिका में एससी-एसटी एक्ट पर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के केंद्र सरकार के एससी-एसटी संशोधन कानून 2018 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट के दो वकील प्रिया शर्मा, पृथ्वी राज चौहान और एक NGO ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के संशोधन कानून को चुनौती दी है.

याचिका में कहा गया है कि सरकार का नया कानून असंवैधानिक है क्योंकि सरकार ने सेक्‍शन 18 ए के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाया है जोकि गलत है और सरकार के इस नए कानून आने से अब बेगुनाह लोगों को फिर से फंसाया जाएगा. याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के नए कानून को असंवैधानिक करार दे और जब तक ये याचिका लंबित रहे, तब तक कोर्ट नए कानून के अमल पर रोक लगाए. आपको बता दें कि राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी करने वाले एससी एसटी संशोधन कानून 2018 को मंजूरी दी थी. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद एससी एसटी कानून पूर्व की तरह सख्त प्रावधानों से लैस हो गया है.

शेयर कर और लोगों तक पहुंचाए
Tagged with:

About author

Related Articles